
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में करीब 14 साल पुराने भूमि विवाद में फिर से हलचल मच गई है। शहर के हथरोई गांव की इस विवादित जमीन की कीमत लगभग ₹400 करोड़ आंकी गई है। विवाद सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद फिर से हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए खुल गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल पुराने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और पूर्व राजपरिवार के बीच चल रहे इस मामले की नई सुनवाई के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर अपील खारिज करना न्यायसंगत नहीं है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद जयपुर के हथरोई गांव की उस जमीन को लेकर है, जो अब शहर के प्रमुख शहरी इलाके में बदल चुकी है। इस भूमि पर रिहायशी कॉलोनियां, स्कूल, अस्पताल और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित हैं। वर्ष 2005 में पूर्व राजपरिवार ने इस जमीन पर अपने अधिकार के लिए सिविल सूट दायर किया था। ट्रायल कोर्ट ने उस समय उनके पक्ष में फैसला दिया था।
JDA का दावा
जयपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि विवादित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सिवायचक (सरकारी अनुत्पादक) जमीन के रूप में दर्ज है। JDA के अनुसार, यह भूमि कभी पूर्व राजपरिवार की निजी संपत्ति नहीं रही और 1949 में भारत में विलय से जुड़े किसी समझौते में इसे निजी संपत्ति के रूप में दर्ज नहीं किया गया था।
पूर्व राजपरिवार की दलीलें
वहीं, जयपुर के पूर्व राजपरिवार का दावा है कि यह जमीन उनकी निजी मिल्कियत रही है और प्रशासन ने बाद में अवैध रूप से इस पर कब्जा कर लिया। यही आधार है जिस पर उनका यह केस शुरू हुआ था।
अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिए हैं कि वह JDA की अपील पर चार सप्ताह के भीतर मेरिट के आधार पर सुनवाई करे। इसके बाद सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद ही जमीन के स्वामित्व का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह मामला जयपुर की सबसे बड़ी भूमि कानूनी लड़ाइयों में से एक माना जा रहा है और इसके नतीजे शहर के शहरी विकास और प्रशासनिक अधिकारों पर असर डाल सकते हैं।