
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने हाल के वर्षों में सोने की जमकर खरीदारी की है और इस दौरान अमेरिका के ट्रेजरी बॉन्ड में अपना निवेश कम किया है। अक्टूबर 2025 तक RBI का अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश 200 अरब डॉलर से नीचे चला गया। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार 190 अरब डॉलर था, जो पिछले साल की तुलना में 50.7 अरब डॉलर कम है।
सोने में बढ़ोतरी
RBI ने इस दौरान अपने भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाकर 880.18 मीट्रिक टन कर दी, जबकि एक साल पहले यह 866.8 मीट्रिक टन थी। सोने को आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। इस रणनीति का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को विविधता प्रदान करना और डॉलर पर निर्भरता कम करना है।
केंद्रीय बैंकों की वैश्विक रणनीति
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, रूस-यूक्रेन युद्ध और वित्तीय अनिश्चितता के बीच, अपने भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के अनुसार, “विकसित देशों में बढ़ते वित्तीय दबावों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण ट्रेजरी में रखे भंडार के मूल्यांकन में नुकसान का जोखिम बढ़ गया। इसे सीमित करने के लिए RBI और अन्य केंद्रीय बैंक अपना कुछ निवेश अमेरिकी ट्रेजरी से हटाकर सोने में लगा रहे हैं।”
किसका निवेश सबसे ज्यादा?
अक्टूबर 2025 के अंत तक, केंद्रीय बैंकों का कुल अमेरिकी ट्रेजरी बिल में निवेश 9.24 ट्रिलियन डॉलर था। इसमें जापान का निवेश सबसे अधिक 1.2 ट्रिलियन डॉलर, उसके बाद यूके 877 अरब डॉलर, और चीन 688.7 अरब डॉलर था। पिछले साल इसी समय चीन का निवेश 760.1 अरब डॉलर था। ब्राजील का निवेश भी 228.8 अरब डॉलर से घटकर 167.7 अरब डॉलर रह गया है।
इस डेटा से स्पष्ट है कि भारत समेत कई उभरते देशों ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश घटाकर सुरक्षित और विविध निवेश विकल्पों की ओर रुख किया है।
