Sunday, July 12

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अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच हिंद महासागर में गरजेंगे BRICS देशों के युद्धपोत चीन-रूस-ईरान की संयुक्त नौसैनिक ड्रिल शुरू, भारत ने बनाई दूरी दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी, भू-राजनीतिक संकेतों पर टिकी दुनिया की नजर

केपटाउन।
अमेरिका से बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच BRICS देशों की संयुक्त नौसैनिक शक्ति प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल पैदा कर दी है। चीन, रूस और ईरान के युद्धपोत दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में हिंद महासागर के रणनीतिक जलक्षेत्र में एक सप्ताह लंबे संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। यह अभ्यास शुक्रवार से शुरू हो गया है।

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दक्षिण अफ्रीका के सशस्त्र बलों ने बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, समुद्री लूट (पाइरेसी) रोधी अभियानों और आपसी सैन्य समन्वय को मजबूत करना है। यह ड्रिल ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कार्रवाई और प्रतिबंधित तेल टैंकरों की जब्ती को लेकर वैश्विक तनाव चरम पर है।

भारत की गैरमौजूदगी ने खींचा ध्यान

इस नौसैनिक अभ्यास की सबसे अहम बात यह रही कि BRICS का प्रमुख सदस्य भारत इसमें शामिल नहीं है।
भारत, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका लंबे समय से BRICS समूह का हिस्सा हैं, जबकि ईरान 2024 में इस समूह में शामिल हुआ था। इसके बावजूद भारत का इस अभ्यास से दूरी बनाना कई रणनीतिक संकेत दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने यह फैसला चीन के साथ सीमित सैन्य सहयोग की नीति को ध्यान में रखते हुए लिया है। हाल के वर्षों में भारत-चीन संबंधों में सुधार के कूटनीतिक प्रयास जरूर हुए हैं, लेकिन रक्षा और सैन्य स्तर पर गहरी साझेदारी से नई दिल्ली अब भी सतर्क है।

दक्षिण अफ्रीका के तट पर युद्धपोतों का जमावड़ा

दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन से दक्षिण स्थित साइमन टाउन नौसैनिक अड्डे पर शुक्रवार को चीनी, रूसी और ईरानी युद्धपोत पहुंचे। यह वही क्षेत्र है, जहां हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर मिलते हैं, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

  • चीन ने 161 मीटर लंबा आधुनिक विध्वंसक जहाज तांगशान तैनात किया है
  • रूस ने करीब 7,000 टन वजनी युद्धपोत मार्शल शापोशनिकोव, एक फ्रिगेट और एक टैंकर भेजा है
  • ईरान ने दो फ्रिगेट अभ्यास में शामिल किए हैं
  • दक्षिण अफ्रीका के तीन जहाज, जिनमें एक ऑफशोर पेट्रोल वेसल शामिल है, भी ड्रिल का हिस्सा हैं

अमेरिका-दक्षिण अफ्रीका रिश्तों पर असर

विश्लेषकों का मानना है कि यह अभ्यास अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है। वॉशिंगटन हाल के महीनों में दक्षिण अफ्रीका की विदेश नीति और BRICS देशों के साथ उसके बढ़ते सैन्य सहयोग को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाता रहा है।

भारत ने क्यों बनाई दूरी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत को इस नौसैनिक अभ्यास के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया था, लेकिन नई दिल्ली ने इसमें शामिल न होने का फैसला लिया।
रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की चीन-केंद्रित सावधान रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जिसके तहत—

  • कूटनीतिक बातचीत जारी रखी जाती है
  • लेकिन संयुक्त सैन्य अभ्यासों और रक्षा सहयोग को सीमित रखा जाता है

भारत के इस फैसले को यह संकेत माना जा रहा है कि वह BRICS के मंच पर भी अपने रणनीतिक हितों और संतुलन की नीति से समझौता नहीं करना चाहता।

 

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