
नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026: हिंदी और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता सईद जाफरी की कहानी सफलता और व्यक्तिगत उलझनों से भरी रही। पर्दे पर उन्होंने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, लेकिन एक पति और पिता के तौर पर उन्हें खुद को असफल मानना पड़ा।
सईद जाफरी का जन्म 8 जनवरी 1929 को हुआ था। करियर की शुरुआत उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो से इंग्लिश अनाउंसर के रूप में की। साल 1951 में उन्होंने फ्रैंक ठाकुरदास और बैंजी बेनेगल के साथ मिलकर अंग्रेजी थिएटर कंपनी ‘यूनिटी थिएटर’ की स्थापना की।
सईद जाफरी ने अपने अभिनय करियर में हिंदी फिल्मों के साथ-साथ ब्रिटिश और अमेरिकन फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने ‘द विल्बी कांस्पीरेसी’, ‘द मैन हू वुड बी किंग’, ‘स्फिंक्स’, ‘अ पेसेज टू इंडिया’ और रिचर्ड एटनबरो की फिल्म ‘गांधी’ में दमदार भूमिकाएं निभाईं। वे ब्रिटिश और कनाडाई फिल्म अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाले पहले एशियाई कलाकार बने।
हिंदी सिनेमा में भी उनके यादगार किरदारों ने दर्शकों का दिल जीता। ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘चश्मे-बद्दूर’, ‘मासूम’, ‘दिल’, ‘हिना’ और ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी फिल्मों में उनका अभिनय आज भी याद किया जाता है।
पर्सनल लाइफ की उलझनें
सफल करियर के बावजूद सईद जाफरी की निजी जिंदगी परेशानियों से भरी रही। उनकी पहली शादी मधुर से हुई, जिनसे उन्हें तीन बेटियां हुईं। लेकिन ब्रिटिश लाइफस्टाइल के प्रति उनकी रुचि और पत्नी पर उसी अंदाज की अपेक्षा ने रिश्ते में दूरियां पैदा कर दीं। 1966 में दोनों का तलाक हो गया।
इसके बाद सईद जाफरी एक विदेशी महिला के साथ रहने लगे, लेकिन बाद में उन्हें इस फैसले पर गहरा पछतावा हुआ। उन्होंने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया कि करियर की दौड़ में उन्होंने अपने निजी रिश्तों को नजरअंदाज कर दिया और खुद को अपनी पहली पत्नी और बेटियों का दोषी मानते रहे।
सईद जाफरी की जिंदगी यह दिखाती है कि सफलता और निजी जीवन में संतुलन बनाना हमेशा आसान नहीं होता।