
इंदौर: औरंगाबाद से अपनी माता-पिता से मिलने आई 24 वर्षीय ज्योति भुसे की जान उनकी छोटी सी आदत ‘पैक्ड वाटर’ पीने की वजह से बच गई, लेकिन उनकी 74 वर्षीय मां मंजुला वाडे को घर के नल का पानी पीने का खामियाजा महंगा पड़ गया और उनकी मौत हो गई। अब 79 वर्षीय पिता दिगंबर वाडे घर में अकेले रह गए हैं।
ज्योति भुसे दो दिन के लिए अपने माता-पिता से मिलने इंदौर आई थीं। पहले दिन उन्होंने सीधे घर न जाकर अपनी बहन के यहां रुकीं और अपने साथ हमेशा की तरह पैक्ड पानी की बोतल रखी। अगले दिन माता-पिता से मिलने पहुंचीं और वहीं रात को परिवार के साथ भोजन किया। उसी रात, जब ज्योति बस में औरंगाबाद लौट रही थीं, उनकी मां मंजुला वाडे ने घर का नल का पानी पी लिया। कुछ ही घंटों में उनकी तबीयत बिगड़ गई और तेज दस्त के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
ज्योति ने बताया, “अगर मैंने पैक्ड पानी नहीं लिया होता, तो शायद मेरी जान भी खतरे में पड़ जाती। वही बोतल मुझे बचा गई।”
मौत के बाद वाडे परिवार में मातम पसरा है। मंजुला की मृत्यु के बाद उनकी पांचों बेटियां इंदौर आ गईं और दाह-संस्कार और घर के अन्य कार्यों में पिता की मदद कर रही हैं। बेटियों ने बताया कि इस घटना ने उनके पिता को अकेला और कमजोर बना दिया है। एक बेटी ने कहा, “यह सिस्टम की गलती है। हमारे पिता बूढ़े हैं और अकेले रह गए हैं। सरकार को उनकी देखभाल करनी चाहिए।”
वाडे परिवार ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा दिया गया मुआवजा केवल अंतिम संस्कार और दाह संस्कार में ही खर्च होगा। पिता दिगंबर वाडे ने कहा, “जो भी बचेगा, मैं अपनी सेहत पर खर्च करूंगा।”
भागीरथपुरा इलाके में पानी में मिलावट की खबरों के बीच नगर निगम की टीमें गलियों की सफाई और पाइपलाइनों का निरीक्षण कर रही हैं। लेकिन वाडे परिवार के लिए यह एक ऐसा संकट बन गया है, जिसने उनका जीवन हमेशा के लिए बदल दिया।