
काबुल: लंबे समय तक कड़ा रुख अपनाने के बाद पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के साथ व्यापार बहाल करने के लिए तैयार दिख रहा है। सोमवार, 5 जनवरी को दोनों देशों ने व्यापारिक मामलों पर औपचारिक बातचीत के लिए 13 सदस्यीय संयुक्त समिति बनाई। इसमें पाकिस्तान के छह और अफगानिस्तान के सात सदस्य शामिल हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पिछले साल अक्टूबर से बंद है। पाकिस्तान ने उस समय अफगानिस्तान में टीटीपी जैसे सशस्त्र गुटों को पनाह देने के मुद्दे को लेकर कार्रवाई की थी। इसके बाद सीमा बंद कर दी गई और दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए।
पाकिस्तान प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्वकर्ता सैयद जवाद हुसैन काजमी ने बताया कि समिति का मुख्य उद्देश्य पाक-अफगान व्यापार मार्ग फिर से खोलना, सीमा प्रबंधन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और द्विपक्षीय व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और आम जनता को होने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करने के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया जाएगा।
काजमी ने उम्मीद जताई कि तोरखम और अन्य सीमा चौकियों को जल्द ही खोला जाएगा और द्विपक्षीय व्यापार बहाल होगा। बीते साल दोनों देशों के व्यापारिक रास्ते पूरी तरह बंद होने से व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ टीटीपी है। पाकिस्तान का कहना है कि टीटीपी के लोग अफगानिस्तान से आकर उसके सुरक्षाकर्मियों पर हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान ने इस गुट को नियंत्रित करने के लिए अफगान तालिबान से लिखित वादा मांगा था, लेकिन तालिबान सरकार सहमत नहीं हुई।
तुर्की, कतर और यूएई की मध्यस्थता के बावजूद अभी तक दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता नहीं हो पाया है।