Wednesday, January 7

शरजील इमाम और उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, एक साल तक जमानत याचिका पर रोक

 

This slideshow requires JavaScript.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोनों आरोपी एक वर्ष तक इस मामले में दोबारा जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों की भूमिका गंभीर है और इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।

 

यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया। अदालत ने 10 दिसंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा था।

 

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—को 12 सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि इन आरोपियों का निरंतर कारावास आवश्यक नहीं है।

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रमुख बातें

 

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं। ऐसे मामलों में वैधानिक कसौटी लागू होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था को सर्वोपरि माना जाना चाहिए।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य आरोपियों की तुलना में उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अधिक गंभीर प्रतीत होती है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

 

हालांकि, अदालत ने यह छूट दी है कि यदि एक वर्ष के भीतर गवाहों की गवाही पूरी नहीं होती है, तो दोनों आरोपी निचली अदालत में दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं।

 

अंतरिम जमानत का उल्लेख

 

इससे पहले, उमर खालिद को अपनी बहन के निकाह के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट ने 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक अंतरिम जमानत दी थी। इस दौरान उन पर कई सख्त शर्तें लगाई गई थीं, जिनमें सोशल मीडिया के उपयोग पर रोक, गवाहों से संपर्क न करने और सीमित लोगों से मिलने की अनुमति शामिल थी। तय अवधि पूरी होने पर उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा था।

 

क्या है पूरा मामला

 

दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2020 में उमर खालिद को गिरफ्तार किया था। उन पर फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने का आरोप है। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। शरजील इमाम सहित कई अन्य लोगों पर भी इसी साजिश में शामिल होने का आरोप है।

 

दिल्ली दंगों में कई लोगों की मौत हुई थी और करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।

 

पिछली सुनवाई में दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि 2020 की हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करने के उद्देश्य से रचा गया एक सुनियोजित और संगठित षड्यंत्र था।

Leave a Reply