Saturday, June 20

This slideshow requires JavaScript.

तटरक्षक बल को मिला सबसे बड़ा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’

 

This slideshow requires JavaScript.

नई दिल्ली, 5 जनवरी — भारत ने समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के बेड़े में देश का सबसे बड़ा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ शामिल किया। 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह पोत ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

 

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘समुद्र प्रताप’ 114.5 मीटर लंबा और लगभग 4,200 टन वजनी है। यह भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई प्रदूषण नियंत्रण वेसल होने के साथ-साथ तटरक्षक बल के बेड़े की अब तक की सबसे बड़ी पोत भी है। इसकी अधिकतम गति 22 नॉट से अधिक है, जो इसे लंबी दूरी के अभियानों के लिए अत्यंत सक्षम बनाती है।

 

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पोत केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, तटीय गश्त और समुद्री सुरक्षा जैसे बहुआयामी कार्यों में भी समान रूप से प्रभावी है। एक ही प्लेटफॉर्म पर कई क्षमताओं का एकीकरण आज की समुद्री चुनौतियों की मांग है, जहां लचीलापन और तत्परता दोनों आवश्यक हैं।

 

राजनाथ सिंह ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि इतने जटिल रक्षा प्लेटफॉर्म में उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री यह दर्शाती है कि भारत का डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम अब परिपक्व हो चुका है। देश ने रक्षा निर्माण में जटिल चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित कर ली है।

 

उन्होंने समुद्री प्रदूषण को एक गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव मछुआरों की आजीविका, तटीय समुदायों के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा पर पड़ता है। ऐसे में तटरक्षक बल द्वारा चलाए जा रहे तटीय स्वच्छता और प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

रक्षा मंत्री ने कहा कि तटरक्षक बल ने किसानों, मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के मन में सुरक्षा का भरोसा पैदा किया है। साथ ही, देश की समुद्री सीमाओं की ओर आंख उठाने वाले दुश्मनों के लिए भी यह स्पष्ट संदेश है कि भारतीय तटरक्षक बल हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।

 

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि समुद्र भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और भविष्य का आधार है। एक सुरक्षित और स्वच्छ समुद्र ही सुरक्षित व्यापार, जीवन और पर्यावरण की गारंटी दे सकता है। ‘समुद्र प्रताप’ जैसे प्लेटफॉर्म इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि भारत अपनी समुद्री प्रतिबद्धताओं को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Leave a Reply