
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब वैश्विक तेल बाजार में हलचल मची हुई है। माना जा रहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर नियंत्रण कर सकता है। इस स्थिति का फायदा भारतीय तेल और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी को हो सकता है।
रिलायंस को सस्ता तेल मिलने की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार, रिलायंस को वेनेजुएला से भारी, खट्टे और अम्लीय कच्चे तेल की आपूर्ति फिर से रियायती दरों पर मिल सकती है। जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स इस तरह के तेल को प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। ऐतिहासिक रूप से वेनेजुएला का तेल ब्रेंट क्रूड की तुलना में $5–8 प्रति बैरल सस्ता रहा है।
रिलायंस ने 2012 में वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA के साथ अपने दैनिक तेल की लगभग 20% आपूर्ति का समझौता किया था। हालांकि 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह सौदा रोक दिया गया था। अब संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका वैश्विक खरीदारों के लिए वेनेजुएला के तेल की बिक्री की अनुमति दे सकता है, जिससे रिलायंस का रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ सकता है।
ओएनजीसी को लंबित लाभांश मिल सकता है
सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी को भी वेनेजुएला की परियोजनाओं से लंबित लाभांश मिलने की उम्मीद है। सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र से ओएनजीसी का बकाया लाभांश $500 मिलियन से अधिक है। इसके अलावा ओरिनोको बेल्ट में कैराबोबो एसेट के विकास को फिर से शुरू किया जा सकता है, जिसमें ओएनजीसी की 11% हिस्सेदारी है।
शेयरों पर असर और विशेषज्ञ राय
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकिंग कंपनी जेफरीज ने रिलायंस और ओएनजीसी के शेयरों पर अपनी Buy रेटिंग दोहराई है। रिलायंस के लिए टारगेट प्राइस 1,785 रुपये और ओएनजीसी के लिए 310 रुपये रखा गया है। इसका मतलब है कि रिलायंस के शेयर में लगभग 12% और ओएनजीसी में 28% तक वृद्धि की संभावना है।
आज बीएसई पर रिलायंस का शेयर 1,611.20 रुपये पर पहुंचा, जो इसका 52 हफ्ते का उच्च स्तर है। वहीं, ओएनजीसी के शेयर में 2% की मामूली गिरावट देखी गई।
निष्कर्ष:
विशेषज्ञों के अनुसार, वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई और तेल आपूर्ति में संभावित बदलाव रिलायंस और ओएनजीसी के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जाती है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तेजी से हो सकता है।