Wednesday, June 17

This slideshow requires JavaScript.

बच्चे के जन्म के बाद नई मां की कैदी जैसी जिंदगी, परिवार की पाबंदियों से परेशान

 

This slideshow requires JavaScript.

 

फतेहपुर: बच्चे का जन्म किसी महिला के जीवन के सबसे खूबसूरत पलों में से एक होता है, लेकिन कुछ नई माताओं के लिए यह समय मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण भी साबित होता है। हाल ही में पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज के पास एक नई मां आईं, जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए।

 

महिला ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद परिवार उसे कमरे से बाहर नहीं निकलने देता था, और कहते थे कि अगर बाहर गई तो बच्चे को कुछ हो जाएगा। इसके साथ ही उसे दूध संभालने और सामान्य कामकाज में भी कई पाबंदियां लगाई गईं। उन्होंने कहा, “कैदी जैसी जिंदगी हो गई। मुझे डर लग रहा है कि कहीं मैं डिप्रेशन में न चली जाऊं।”

 

डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने बताया कि यह स्थिति अक्सर जापे पीरियड के दौरान होती है। जापे पीरियड में नई मां को 40 दिनों तक आराम करने की सलाह दी जाती है। यह प्रथा सदियों पहले बनाई गई थी ताकि महिला डिलीवरी के बाद कमजोर शरीर को आराम दे सके और बच्चे की देखभाल पूरी तरह से कर सके।

 

डॉक्टर के अनुसार, मां का बच्चे के साथ फिजिकल कॉन्टैक्ट उसके शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज करता है, जो डिलीवरी के बाद यूट्रस को पुराने आकार में लाने और मां की रिकवरी में मदद करता है। साथ ही, बच्चे की बॉडी टेम्परेचर और ब्रेस्टफीडिंग भी बेहतर होती है।

 

डॉ. भारद्वाज ने कहा कि नई मां को जितना आराम मिल रहा है, उसे लेना चाहिए। कमरे में बैठे-बैठे मानसिक थकान महसूस हो रही हो तो बालकनी, छत, पार्क या छोटी ड्राइव पर जाया जा सकता है, लेकिन भीड़भाड़ या मॉल जैसी जगहों पर जाने से बचें, ताकि इंफेक्शन का खतरा न हो।

 

 

Leave a Reply