
छिंदवाड़ा: परासिया में जहरीले कफ सिरप कांड में शुक्रवार को SIT ने न्यायालय में 4500 पन्नों की फाइनल चार्जशीट पेश की। चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अभी शामिल नहीं हो सके हैं, जिससे पीड़ित परिवारों में नाराजगी व्याप्त है।
22 बच्चों की मौत और जांच की अधूरी तस्वीर
इस घातक कांड में 22 बच्चों की किडनी फेलियर के कारण मौत हुई। एसआईटी अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन जांच के दायरे में कई अन्य संदिग्ध चेहरे अब भी शामिल हैं। पीड़ित परिवारों के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि इतने बड़े और संवेदनशील मामले में पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी रही है। चार्जशीट में अब भी अहम वैज्ञानिक और चिकित्सकीय साक्ष्य शामिल नहीं हैं, जो न्याय के लिए आवश्यक हैं।
जांच में सामने आया गंभीर तथ्य
जांच में यह पाया गया कि अगस्त 2025 के अंतिम सप्ताह से बीमार बच्चे डॉ. प्रवीण सोनी के पास पहुंचे, जिनमें किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं पाई गईं। 11 सितंबर को वेदांश पवार नामक बच्चा नागपुर के डॉ. प्रवीण खापेकर के पास गया। परिजनों से चर्चा के बाद डॉ. खापेकर ने डॉ. प्रवीण सोनी से 281 सेकंड तक फोन पर बातचीत की।
संदेह के बावजूद बिक्री जारी रही
जांच में यह भी उजागर हुआ कि कफ सिरप में गड़बड़ी की जानकारी होने के बावजूद डॉ. प्रवीण सोनी की पत्नी के मेडिकल स्टोर से कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री जारी रही। जिन बच्चों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ, उनके बिसरा की रासायनिक जांच रिपोर्ट और चिकित्सा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट अभी लंबित हैं।
सीपीपी की जगह कोल्ड्रिफ सिरप दिया गया
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मयंक पुत्र नीलेश सूर्यवंशी को डॉक्टर ने सीपीपी सिरप लिखी थी, लेकिन रसेला मेडिकल स्टोर से कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया। प्रिस्क्रिप्शन पर्ची में दवा का नाम बदला नहीं गया। इसके सेवन से मयंक की किडनी फेल हुई और उसकी मौत हो गई।
आगे की कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि शेष रिपोर्ट मिलने के बाद चार्जशीट में पूरक दस्तावेज जोड़े जाएंगे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।