Saturday, January 3

अमेरिका की समर्थन वाली “तख्तापलट योजना” और ईरान में विरोध प्रदर्शन

 

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तेहरान: ईरान में महंगाई, बेरोज़गारी और इस्लामिक सरकार के विरोध में पिछले एक हफ्ते से देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुले तौर पर धन्यवाद दिया और बताया कि उनके पास ईरान में “स्थिर बदलाव” की योजना है।

 

रजा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी “अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं” और उन्हें अमेरिका के साथ संबंध बहाल करने का संदेश लेकर भेजा गया है। उनका कहना है कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक शासन गिरता है तो उनका मकसद ईरान में लोकतंत्र और स्थिरता लाना है।

 

उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शनकारी “मुख्य रास्तों और सड़कों पर नाकाबंदी करके शासन के दमन को कमजोर कर सकते हैं।” रजा पहलवी ने लोगों से डर पर काबू पाने और छोटे समूहों में एकजुट होकर सड़कों पर उतरने की अपील की।

 

इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान की इस्लामिक सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। इसी रुख को अमेरिकी सीनेटर टॉम कॉटन और पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी समर्थन दिया।

 

ईरान में इस्लामिक शासन के विरोध का इतिहास लंबे समय से रहा है। 1979 में शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन का अंत बड़े विरोध प्रदर्शन और हड़तालों के बाद हुआ था। इसके बाद आयतुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ईरान लौटे और देश को “इस्लामिक रिपब्लिक” घोषित किया गया। तब से अब तक ईरान कट्टर इस्लामिक शासन के अधीन है, जिसमें महिलाओं के अधिकारों पर भी क़रीब-क़रीब पूरी तरह रोक लगी है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा प्रदर्शन बढ़ते हैं और अमेरिका का समर्थन भी खुलकर सामने आता है, तो ईरान में बड़े पैमाने पर राजनीतिक बदलाव की संभावना हो सकती है।

 

 

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