
लखनऊ, 2 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत राज्य की बिजली कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं को 102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लौटानी होगी। यह राशि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की अधिकतम वसूली दर से अधिक राशि वसूलने के कारण उपभोक्ताओं को हुई थी।
आयोग ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इस अतिरिक्त वसूली की राशि उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित की जाएगी। यह निर्णय आयोग के द्वारा जारी की गई कॉस्ट डाटा बुक के आधार पर लिया गया है, जिसमें स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की वास्तविक लागत 2800 रुपये बताई गई है। हालांकि, बिजली कंपनियों ने बिना अनुमति के इन मीटरों की कीमत 6016 रुपये प्रति मीटर वसूली थी।
कैसे हुआ नुकसान:
उपभोक्ताओं से वसूले गए अतिरिक्त रुपये से लाखों उपभोक्ताओं को नुकसान हुआ। 10 सितंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक लगभग 3,18,740 विद्युत उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर के लिए एस्टिमेट जमा किया था, जिनमें लगभग 90% उपभोक्ता सिंगल फेस मीटर के थे। अगर कंपनियों द्वारा वसूली गई दर 6016 रुपये के आधार पर आकलन किया जाए तो कुल वसूली लगभग 191 करोड़ रुपये होनी थी। जबकि नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 2800 रुपये की दर से यह राशि 89 करोड़ रुपये होती है। इसके परिणामस्वरूप बिजली कंपनियों को 102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित करनी होगी।
नियामक आयोग का आदेश:
आयोग ने आदेश दिया है कि सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम कीमत 2800 रुपये और थ्री फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम कीमत 4100 रुपये ही वसूली जा सकती है। इसके साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में काम करता है, और उपभोक्ता को अपनी सहमति से ही प्रीपेड मोड चुनने का अधिकार है।
आयोग के इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि बिजली कंपनियां अब उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में कनेक्शन नहीं दे सकेंगी।
बिजली कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट करना होगा:
आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने सॉफ़्टवेयर को 12 जनवरी तक अपडेट कर लें और नई कॉस्ट डाटा बुक को लागू करें। इस आदेश के बाद, बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं के बिलों में राशि समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
उपभोक्ता परिषद का आभार:
इस निर्णय के बाद, यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से मिलकर उनके इस फैसले पर आभार व्यक्त किया।
इस फैसले से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी और अब स्मार्ट मीटर के मामले में पारदर्शिता और उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।