
2026 में अमेरिकी डॉलर का वर्चस्व धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। अमेरिका का कर्ज 37 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है, जबकि रोजाना 22 अरब डॉलर का नया कर्ज बढ़ रहा है। इससे वैश्विक वित्तीय अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। निवेशक अब अमेरिका से पैसा निकाल रहे हैं और IMF भी चिंता जता चुका है।
अमेरिका पर बढ़ता कर्ज का दबाव
हर अमेरिकी पर करीब 1 लाख डॉलर का कर्ज है। चीन, जापान, ब्रिटेन और कनाडा जैसी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बेच रही हैं। ब्याज दरें बढ़ा कर अमेरिका निवेशकों को रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे वित्तीय संकट और गहरा रहा है।
भारत-रूस व्यापार में डॉलर की हिस्सेदारी घट रही
रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के मुताबिक, भारत और रूस के बीच लगभग 90% व्यापार अब स्थानीय और वैकल्पिक मुद्राओं में हो रहा है। डॉलर का उपयोग बेहद कम हो गया है। भारत ने जुलाई 2022 में RBI के माध्यम से रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार निपटान की अनुमति देकर यह दिशा तय की थी।
BRICS मुद्रा की संभावनाएँ
ब्रिक्स देशों की नई मुद्रा वैश्विक वित्तीय प्रणाली में बदलाव ला सकती है। इससे सीमा-पार लेनदेन कुशल होंगे, वित्तीय समावेशन बढ़ेगा और आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। डिजिटल मुद्रा, ब्लॉकचेन और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल इस प्रक्रिया को तेज करेगा।
वैश्विक संदर्भ और पुतिन की भूमिका
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डॉलर पर निर्भरता कम करने का संकेत देते हुए कहा कि यदि अमेरिका बाधाएं डालता है, तो वैकल्पिक भुगतान चैनल तैयार करना आवश्यक है। यह कदम अमेरिका-यूरोप की पाबंदियों का असर कम करने और ब्रिक्स देशों की आर्थिक शक्ति बढ़ाने की दिशा में है।
निष्कर्ष
दुनिया के सबसे बड़े अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका के डॉलर पर वर्चस्व में कमी आने लगी है। भारत और रूस जैसे देशों के साथ बढ़ता गैर-अमेरिकी मुद्रा व्यापार और BRICS की नई मुद्रा की तैयारी वैश्विक वित्तीय समीकरण बदल सकती है।