Sunday, June 21

This slideshow requires JavaScript.

टैरिफ की दीवार और भरोसे में दरार: भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्यों अटकी?

 

This slideshow requires JavaScript.

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: साल 2025 में भारत और अमेरिका के बीच लंबित ट्रेड डील लगातार उलझनों में फंसी रही। दोनों देशों के अधिकारी कई दौर की कठिन बातचीत के बावजूद बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) फाइनल नहीं कर पाए। इस दौरान अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% तक कर दिया, जिसका सीधा असर टेक्सटाइल, लेदर और फुटवियर इंडस्ट्री पर पड़ा।

 

ट्रंप प्रशासन और भारत की रणनीति:

अमेरिका का मानना है कि भारत अपनी संरक्षणवादी नीतियों—जैसे ऊंचे शुल्क, जटिल मानक और नियामकीय अनिश्चितता—से कारोबार के रास्ते में बाधा डाल रहा है। वहीं, भारत ने अपने घरेलू संवेदनशीलताओं और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए दबाव झेलने से इंकार किया। ट्रंप प्रशासन में यह धारणा भी है कि भारत दोनों नांवों की सवारी कर रहा है—अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी और रूस के साथ ऊर्जा व रक्षा संबंध।

 

सबसे बड़ी अड़चनें:

भारत और अमेरिका के बीच सबसे जटिल मुद्दे हैं—कृषि और डिजिटल व्यापार। अमेरिका चाहता है कि भारत GM सोया और मक्का के लिए बाजार खोले, जबकि भारत ने अपने नॉन-GM उत्पादों और घरेलू संवेदनशीलताओं का हवाला दिया। डिजिटल ट्रेड पर अमेरिका WTO के ई-कॉमर्स मोरेटोरियम को स्थायी बनाना चाहता है, जबकि भारत नीति लचीलापन बनाए रखना चाहता है।

 

क्या 2026 में डील संभव है?

दोनों पक्ष रणनीतिक महत्व को समझते हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर और FDI स्रोत है, जबकि भारत को अमेरिकी वेंचर कैपिटल और रेमिटेंस से लाभ होता है। दिसंबर में भारत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के दौरे ने कुछ सकारात्मक संकेत दिए। अमेरिका के व्यापार अधिकारी जैमीसन ग्रीर ने भारतीय प्रस्ताव को “अब तक का सबसे अच्छा” बताया। भारत ने आयात-गुणवत्ता मानकों को सरल करने और निरीक्षण घटाने की पेशकश की है।

 

लेकिन अंतिम फैसला वॉशिंगटन की राजनीतिक मंजूरी पर निर्भर है। सवाल यही है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन 2026 में भारत के साथ ट्रेड डील करेगा, या यह तनाव जारी रहेगा।

 

Leave a Reply