
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जल संकट को स्थायी रूप से दूर करने और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। योजना के अनुसार प्रदेश में उत्पन्न होने वाले वेस्ट वाटर (अपशिष्ट जल) का ट्रीटमेंट कर उसे दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाएगा।
योजना के तीन चरण होंगे:
पहला चरण (2025–2030): पहले से उपलब्ध सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में 50% अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग।
दूसरा चरण (2030–2035): पहले चरण वाले क्षेत्रों में 100% वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट और पुन: उपयोग।
तीसरा चरण (2045 तक): जिन क्षेत्रों में अभी उपचार की सुविधा नहीं है, वहां चरणबद्ध रूप से 30%, 50% और अंत में 100% वेस्ट वाटर का उपयोग।
इस पहल से न केवल भूजल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि कृषि, उद्योग और शहरी विकास में भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। ट्रीटेड जल का उपयोग कृषि सिंचाई, औद्योगिक इकाइयों और शहरी गैर-पेय कार्यों में किया जाएगा।
योजना के पर्यावरणीय और आर्थिक फायदे भी हैं। इससे नदियों और जल संसाधनों का संरक्षण होगा, जल संतुलन मजबूत होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिंदर सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जल संरक्षण और प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर का मॉडल बनकर उभर रहा है।