
भोपाल, 1 जनवरी: इंदौर के भागीरथपुरा में बेमौत मर रहे लोगों पर सवाल पूछना बीजेपी के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को नागवार गुजरा। 15 दिनों से फैली डायरिया और 10 मौतों के बावजूद मंत्री ने सवाल पूछने वाले पत्रकार से झल्लाकर कहा कि यह सवाल ‘फोकट’ का है और क्या घंटा हो गया।
मंत्री की यह तिलमिलाहट इस वजह से भी सामने आई कि प्रभावित इलाके में उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं है और वे खुद फिल्टर या बोतलबंद पानी पीते हैं। पत्रकार की तर्कपूर्ण प्रतिक्रिया के बाद मंत्री ने घटनास्थल छोड़ दिया।
विवाद के बाद माफी
इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर माफी मांगते हुए कहा कि पिछले दो दिनों से टीम लगातार प्रभावित क्षेत्र में स्थिति सुधारने में लगी थी। दूषित पानी से प्रभावित लोगों की पीड़ा में मेरी प्रतिक्रिया गलत थी, इसके लिए खेद प्रकट करता हूँ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लोग पूरी तरह सुरक्षित नहीं होने तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
मंत्री का व्यवहार और जनता की नाराजगी
भागीरथपुरा क्षेत्र का पार्षद वाघेला भी विवाद में शामिल हो गया, जब लोगों की मौत के बाद पार्क में झूला झूलते पाए गए। जनता और पत्रकारों का कहना है कि मंत्री अपनी जुबान और जिम्मेदारी में सामंजस्य बनाए बिना संवेदनशील मामलों में प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।
कैलाश विजयवर्गीय की यह पहली विवादित टिप्पणी नहीं है। पूर्व में भी उन्होंने महिलाओं और विपक्षी नेताओं के बारे में आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं।
सवाल यह है:
जब शहर में जल संकट और जहरीले पानी के मामले सामने आते हैं, और यह क्षेत्र मंत्री का निर्वाचन क्षेत्र हो, तब सवाल पूछना पत्रकार या जनता को ‘फोकट’ क्यों लगता है?। आलोचक मानते हैं कि फिल्टर या बोतलबंद पानी पीने वाले मंत्री लोगों की पीड़ा समझने में असमर्थ हैं।