Thursday, January 1

जब एक विधायक ने बचा ली थी नीतीश सरकार सुधांशु शेखर को मिला इनाम, NDA की सरकार गिरने से रोकने वाले नेता को मिली बड़ी जिम्मेदारी

 

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बिहार की राजनीति में कभी-कभी एक फैसला, एक कदम और एक व्यक्ति पूरे सत्ता समीकरण को बदल देता है। ऐसा ही कुछ वर्ष 2024 में हुआ था, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की NDA सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले ही गिरने के कगार पर पहुंच गई थी। उस राजनीतिक संकट में हरलाखी से विधायक सुधांशु शेखर ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब करीब दो साल बाद नीतीश कुमार और NDA सरकार ने उन्हें इसका राजनीतिक इनाम दे दिया है।

 

सुधांशु शेखर को सचेतक बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। राजनीतिक हलकों में इसे उस वफादारी और साहस का पुरस्कार माना जा रहा है, जिसने NDA सरकार को बचा लिया था।

 

फरवरी 2024: जब डगमगा गई थी NDA सरकार

 

12 फरवरी 2024 को नीतीश कुमार को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना था। उससे पहले यह खबर तेजी से फैली कि जदयू और भाजपा के कुछ विधायक महागठबंधन के संपर्क में हैं। चर्चाएं थीं कि करोड़ों रुपये और मंत्री पद का लालच देकर विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

 

इसी बीच परबत्ता के तत्कालीन विधायक डॉ. संजीव कुमार और रुपौली की विधायक बीमा भारती के पाला बदलने की खबरों ने राजनीतिक भूचाल ला दिया। यदि कुछ विधायक भी टूट जाते, तो NDA सरकार का गिरना तय माना जा रहा था।

 

FIR और पांच करोड़ का ऑफर

 

इसी नाजुक वक्त में हरलाखी विधायक सुधांशु शेखर ने 14 फरवरी 2024 को पटना में एक FIR दर्ज कराई, जिसने पूरे घटनाक्रम को पलट कर रख दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें महागठबंधन में शामिल होने के लिए 5 करोड़ रुपये और मंत्री पद का ऑफर दिया गया था।

 

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि यह प्रस्ताव किसी बाहरी व्यक्ति के जरिए नहीं, बल्कि उनकी ही पार्टी के एक विधायक के माध्यम से दिलवाया गया था। FIR दर्ज कराकर मीडिया के सामने आए सुधांशु शेखर ने कहा था,

 

“मैं अपने नेता नीतीश कुमार का बहुत सम्मान करता हूं। वे मेरे लिए भगवान समान हैं। मैं उनके खिलाफ किसी भी साजिश का हिस्सा नहीं बन सकता।”

 

महागठबंधन की रणनीति पर फिरा पानी

 

सुधांशु शेखर की FIR और सार्वजनिक बयान के बाद पूरा घटनाक्रम उजागर हो गया। दबाव और नैतिकता के चलते बागी माने जा रहे विधायक भी विधानसभा पहुंचे और NDA के पक्ष में मतदान किया। इस तरह नीतीश सरकार बच गई और महागठबंधन की पूरी रणनीति ध्वस्त हो गई।

 

बाद में बीमा भारती और डॉ. संजीव कुमार ने 2025 में राजद का दामन थाम लिया, लेकिन तब तक यह स्पष्ट हो चुका था कि सत्ता पलट की साजिश नाकाम हो चुकी है।

 

दो साल बाद मिला राजनीतिक सम्मान

 

अब, लगभग दो वर्ष बाद, सुधांशु शेखर को नीतीश कुमार और NDA सरकार ने सचेतक पद के साथ राज्य मंत्री का दर्जा देकर सम्मानित किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला न सिर्फ व्यक्तिगत निष्ठा का पुरस्कार है, बल्कि यह संदेश भी है कि पार्टी नेतृत्व संकट के समय साथ देने वालों को भूलता नहीं।

 

बिहार की राजनीति में यह प्रकरण एक बार फिर साबित करता है कि सत्ता की बाज़ी कई बार संख्या से नहीं, बल्कि निष्ठा और साहस से जीती जाती है।

 

 

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