Monday, June 22

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जलपाईगुड़ी में जन्मी, फिर भी भारत विरोधी रुख अपनाया: खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई कठिन दौर देखे

 

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नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और BNP की अध्यक्ष खालिदा जिया का मंगलवार तड़के लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं और चार दशकों से अधिक समय तक बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रमुख हस्ती रहीं।

 

भारत में हुआ जन्म

 

खालिदा जिया का जन्म 1945 में अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी में हुआ था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में आ गया। 1960 में उन्होंने जियाउर रहमान से शादी की, जो बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रपति और BNP के संस्थापक बने।

 

राजनीतिक सफर

 

1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद बीएनपी संकट में पड़ गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने खालिदा जिया से नेतृत्व संभालने का आग्रह किया। 1984 में उन्हें पार्टी की अध्यक्ष चुना गया और उन्होंने 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद 2001 में दूसरा कार्यकाल भी निभाया।

 

भारत के साथ कठोर रिश्ते

 

प्रधानमंत्री रहते हुए खालिदा जिया ने भारत-बांग्लादेश संबंधों के सबसे कठिन दौर का सामना किया। उन्होंने सड़क मार्ग से आवागमन, कनेक्टिविटी पहलों और राजनयिक समझौतों का विरोध किया। उनका तर्क था कि ऐसे समझौते बांग्लादेश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा हैं।

 

उन्होंने 1972 की भारत-बांग्लादेश मैत्री संधि के नवीनीकरण का विरोध भी किया, इसे बांग्लादेश को ‘जकड़ने’ वाला बताया। अपनी नीतियों को वे अक्सर भारत के प्रभुत्व के खिलाफ बचाव के रूप में पेश करती थीं और BNP को ‘बांग्लादेश के हितों का रक्षक’ बताया।

 

विरोध की वजह

 

प्रधानमंत्री रहते हुए खालिदा जिया ने भारत को पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुँचने के लिए बांग्लादेशी क्षेत्र से आवागमन देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि भारतीय ट्रकों का बांग्लादेशी सड़कों पर बिना टोल का आवागमन ‘गुलामी’ के बराबर होगा।

 

खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उन्होंने बांग्लादेश में महिला नेतृत्व और राष्ट्रीय हितों के लिए संघर्ष की एक अलग पहचान बनाई।

 

 

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