Monday, February 2

कश्मीर में सीजन की पहली बर्फबारी, सोनमर्ग-गुलमर्ग में मौसम बदला, लेह-श्रीनगर हाईवे बंद

जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में रविवार को सीजन की पहली बर्फबारी हुई, जबकि घाटी के मैदानी क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई। इसके चलते मौसम में बदलाव के साथ ही श्रीनगर में इस सर्दी की अब तक की सबसे गर्म रात भी रही। मौसम विभाग के अनुसार, श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 6 डिग्री अधिक है।

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बर्फबारी और बारिश से आई राहत

गुलमर्ग और सोनमर्ग में भी सीजन की पहली बर्फबारी हुई। तीन महीने से चल रहे सूखे के बाद बारिश और बर्फबारी ने हवा में मौजूद सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर को धो दिया, जिससे वातावरण साफ और सांस लेना आसान हो गया। स्थानीय लोग और पर्यटक मौसम की इस नरमी से खुश हैं।

स्की रिजॉर्ट और पर्यटन पर असर

गुलमर्ग के स्की रिजॉर्ट और सोनमर्ग हिल स्टेशन पर बर्फबारी ने क्रिसमस और न्यू ईयर के जश्न को और आकर्षक बना दिया। बर्फ न होने की वजह से पहले जश्न फीका पड़ने की चिंता थी, लेकिन अब उम्मीद जताई जा रही है कि हिल स्टेशनों पर टूरिस्टों की बड़ी संख्या में उपस्थिति होगी। ऊंचाई वाले इलाकों के बारहमासी जलाशय भी इस बर्फबारी से भरेंगे, जो गर्मियों में पानी की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

तापमान की जानकारी

रात भर बादल छाए रहने के कारण घाटी में तापमान सामान्य से अधिक रहा। गुलमर्ग और पहलगाम में क्रमशः माइनस 1.5 डिग्री और 2.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अन्य क्षेत्रों में जम्मू 11.5, कटरा 11.6, बटोटे 7.6, बनिहाल 6 और भद्रवाह 5.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

हाईवे और मार्ग बंद

जोजिला पास, कुपवाड़ा का सदना टॉप, बांदीपोरा का रजदान पास और अनंतनाग का सिंथन पास पर बर्फबारी के कारण ट्रैफिक रोक दिया गया। मुगल मार्ग और सिंथन टॉप मार्ग भी हल्की से मध्यम बर्फबारी के कारण बंद रहे। श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर हालांकि रुक-रुक कर गाड़ियों की आवाजाही जारी रही।

पीर की गली में फंसे लोग

दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में पीर की गली इलाके में तीन इंच से अधिक हिमपात होने के कारण प्रशासन ने आवाजाही रोक दी। सड़क पर फंसे तीन चाय विक्रेताओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

बीआरओ ने बर्फ हटाने का काम शुरू किया

बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन) ने फंसे हुए लोगों तक पहुंचने और बर्फ हटाने का काम शुरू कर दिया है। सिंथन टॉप मार्ग और अन्य ऊंचाई वाले मार्ग आमतौर पर सर्दियों में भारी हिमपात के कारण कई महीनों तक बंद रहते हैं।

इस बर्फबारी से न केवल पर्यावरण में सुधार हुआ है, बल्कि कश्मीर के सर्दियों के पर्यटन और जल स्रोतों के लिए भी यह लाभकारी साबित होगी।

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