
शुगर मिलों और गन्ना विभाग के अधिकारियों पर मनमानी और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए सैकड़ों किसान पिछले चार दिनों से मेरठ स्थित गन्ना भवन पर धरना देकर डटे हुए हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसानों का आंदोलन जारी है। दिन में गन्ने की होली जलाकर आक्रोश जताने वाले किसानों ने रात होते ही गीत-संगीत और नृत्य के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया। “अपनी तो जैसे-तैसे कट जाएगी, आपका क्या होगा जनाब-ए-आली” जैसे गीतों पर झूमते किसान व्यवस्था पर तीखा तंज कसते नजर आए।
यह धरना भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले चल रहा है, जिसकी अगुवाई जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी कर रहे हैं। किसानों की मुख्य मांग गन्ना इंडेंट बढ़ाने और शुगर मिलों की कथित तानाशाही पर रोक लगाने की है। आंदोलन के दौरान किसानों ने गन्ना भवन के सभी कार्यालयों पर ताले जड़ दिए और जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय के बाहर ही गद्दे बिछाकर डेरा डाल लिया। किसानों का साफ संदेश है—जब तक समाधान नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
समय पर नहीं बिक पा रहा खेत में खड़ा गन्ना
किसानों का आरोप है कि मोहिउद्दीनपुर और मवाना शुगर मिलों में गन्ना आपूर्ति के नाम पर खुला खेल चल रहा है। यदि किसान का इंडेंट 18 क्विंटल का है और ट्रॉली में 24 क्विंटल गन्ना होता है, तो मिल गन्ना लेने से मना कर देती है। वहीं किसी दिन अधिक गन्ना लेने पर अगला इंडेंट उसी अनुपात में बढ़ा दिया जाता है, जिससे किसान पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और खेत में खड़ा गन्ना समय पर नहीं बिक पा रहा।
जानबूझकर परेशान करने का आरोप
किसानों का कहना है कि जिन गन्ना किस्मों की आपूर्ति स्वयं शुगर मिलों ने की थी, अब उन्हीं किस्मों को रिजेक्ट किया जा रहा है, जबकि अन्य मिलों में ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। इससे साफ होता है कि कुछ मिलें किसानों को जानबूझकर परेशान कर रही हैं।
वार्ताएं रहीं बेनतीजा
बुधवार को एडीएम सिटी बृजेश कुमार और उप गन्ना आयुक्त राजीव राय ने किसानों से बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। शाम और देर रात तक चली वार्ताएं भी बेनतीजा रहीं। बातचीत में एडीएम सिटी बृजेश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी बीके पटेल, सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और शुगर मिलों के गन्ना महाप्रबंधक भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी वीके सिंह ने फोन पर जल्द समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन किसान ठोस कार्रवाई से पहले पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
ठंड में भी नहीं टूटा हौसला
धरने के दौरान भीषण ठंड के चलते कई किसानों की तबीयत बिगड़ गई, फिर भी आंदोलन की धार कम नहीं हुई। रात में रागिनी, गीत और नृत्य के माध्यम से किसानों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। मेज चिंदोड़ी, हर्ष चहल, बिट्टू, भोपाल, सत्यवीर, देशपाल, नरेश, सुनील, अनूप, नीरज, सनी प्रधान समेत बड़ी संख्या में किसान धरना स्थल पर मौजूद रहे।
किसानों का दो टूक कहना है—जब तक गन्ने का न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।