
नई दिल्ली: अमेरिका में 2025 का साल विदेशी स्टूडेंट्स और वर्कर्स के लिए चुनौतियों भरा रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद लगातार इमिग्रेशन और वीजा नियमों में बदलाव किए गए, जिसका सीधा असर अमेरिका में पढ़ाई और काम करने वाले विदेशी स्टूडेंट्स और वर्कर्स पर पड़ा। आइए जानते हैं 2025 में ट्रंप सरकार द्वारा लिए गए 10 ऐसे फैसले, जिन्होंने स्टूडेंट-वर्कर्स को सबसे ज्यादा परेशान किया:
- H-1B वीजा की फीस बढ़ाई – सितंबर 2025 में H-1B वीजा फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी गई, जिससे विदेशी स्टूडेंट्स के लिए वीजा पाना मुश्किल हो गया।
- सोशल मीडिया जांच अनिवार्य – नए वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल जांच शुरू की गई। संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर वीजा अस्वीकार किया जा सकता है।
- SEVIS रिकॉर्ड रद्द करना – कई विदेशी स्टूडेंट्स के SEVIS रिकॉर्ड रद्द कर दिए गए। सरकार ने उन्हें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए खतरा बताया।
- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी विवाद – ट्रंप सरकार ने विदेशी स्टूडेंट्स को हार्वर्ड में एडमिशन से रोका और रिसर्च फंडिंग भी रोक दी।
- ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ खत्म करना – F-1 और J-1 वीजा होल्डर्स के लिए पूरे कोर्स के बजाय केवल 2-4 साल तक रहने की अनुमति देने का प्रस्ताव।
- इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम फंडिंग रोकना – फुलब्राइट और अन्य इंटरनेशनल प्रोग्राम्स की फंडिंग रोक दी गई, जिससे विदेशी स्कॉलर्स प्रभावित हुए।
- 30 से ज्यादा देशों पर ट्रैवल बैन – अफगानिस्तान, ईरान समेत कुल 30 से अधिक देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी के दरवाजे बंद।
- सैलरी के आधार पर H-1B वीजा देने का प्रस्ताव – लॉटरी सिस्टम खत्म कर, उच्च सैलरी वालों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव, जिससे एंट्री-लेवल जॉब पाना मुश्किल।
- जन्म से मिलने वाली नागरिकता खत्म – अमेरिका में पैदा हुए गैर-नागरिक बच्चों को अब नागरिकता नहीं दी जाएगी।
- ऑटोमैटिक EAD एक्सटेंशन रोकना – वर्क परमिट का ऑटोमैटिक एक्सटेंशन बंद, अप्रूवल के बिना जॉब करना अब संभव नहीं।
विशेष: इन फैसलों का प्रभाव विशेषकर विदेशी स्टूडेंट्स, रिसर्च स्कॉलर्स और H-1B वर्कर्स पर पड़ा। कई मामलों में विदेशी स्टूडेंट्स को देश छोड़ना पड़ा या रोजगार पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।