Friday, June 26

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तिहाड़ जेल में एक दिन की भूख हड़ताल के बाद लोकसभा पहुंचे इंजीनियर राशिद जम्मू-कश्मीर के unresolved मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास

बारामूला से लोकसभा सांसद और अवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) के प्रमुख इंजीनियर राशिद ने तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर एक दिवसीय भूख हड़ताल की। जेल से सीधे संसद पहुंचे राशिद ने इस प्रतीकात्मक कदम के ज़रिये जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के लोगों की वर्षों से लंबित समस्याओं पर केंद्र सरकार को संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

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AIP के प्रवक्ता इनाम-उन-नबी के अनुसार, इंजीनियर राशिद ने बुधवार सुबह भूख हड़ताल शुरू कर दी थी और यह जानकारी उन्होंने 10 दिसंबर को ही लोकसभा को दे दी थी। पार्टी ने इस हड़ताल को “दशकों से चले आ रहे दर्द और अनसुलझी शिकायतों” की ओर देश का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास बताया है।

पीएम को लिखा था पत्र, LG–CM विवाद पर जताई थी चिंता

सदन की कार्यवाही से पहले इंजीनियर राशिद द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र की चर्चा भी दिनभर होती रही। पत्र में उन्होंने उपराज्यपाल प्रशासन और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के बीच बढ़ते मतभेदों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टकराव के कारण जनता में अनिश्चितता बढ़ रही है और विकास–कल्याण से जुड़े अहम निर्णय ठप पड़ते जा रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि इससे शासन में पारदर्शिता लौटेगी और दोनों संस्थानों की विश्वसनीयता बनी रहेगी।

संसद में कहा—जेल में रहते हुए चुनाव जीता, मतदाताओं पर गर्व

चुनावी सुधारों पर चर्चा में भाग लेते हुए इंजीनियर राशिद ने कहा कि जेल में होते हुए भी उन्होंने चुनाव लड़ा और दो लाख मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने मतदाताओं के प्रति आभार जताते हुए चुनाव आयोग को भी ‘दबावों के बावजूद स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव’ कराने के लिए धन्यवाद दिया।

परिसीमन पर जताई आपत्ति

सदन में अपनी बात रखते हुए राशिद ने जम्मू-कश्मीर में हुए नए सीट परिसीमन पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कश्मीर में मात्र एक सीट बढ़ाई गई, जबकि जम्मू क्षेत्र में पाँच सीटों की वृद्धि की गई—जो उनके अनुसार संतुलित प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।

भूख हड़ताल का संदेश– “राजनीतिक स्वार्थ नहीं, जन पीड़ा को दें प्राथमिकता”

सदन में मौजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक हितों को जनता की पीड़ा और मूल समस्याओं पर हावी नहीं होने देना चाहिए तथा जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर ईमानदारी से पहल करने की आवश्यकता है।

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