Friday, June 12

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चार धाम रोड चौड़ीकरण पर विवाद तेज़, उत्तरकाशी में पेड़ों पर बांधे जा रहे ‘रक्षा सूत्र’

उत्तरकाशी: चार धाम ऑल-वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के खिलाफ उत्तरकाशी में जनआंदोलन तेज़ हो गया है। रविवार को देशभर से आए पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वैज्ञानिकों और युवाओं ने हर्षिल क्षेत्र में इकट्ठा होकर उन देवदार के पेड़ों की पूजा की, जिन्हें सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे जाने की तैयारी है। प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों के तनों पर ‘रक्षा सूत्र’ बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया।

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आयोजकों के अनुसार, परियोजना के तहत 6000 से अधिक पुराने देवदार के पेड़ों को हटाने की योजना है। अधिकांश पेड़ दशकों पुराने हैं और भागीरथी इको-सेंसिटिव ज़ोन (BESZ) में आते हैं। ‘हिमालय है तो हम हैं’ यात्रा के नाम से शुरू हुआ यह आंदोलन सितंबर में वरिष्ठ नेताओं — मुरली मनोहर जोशी, करण सिंह सहित 50 से अधिक सिविल सोसायटी सदस्यों — द्वारा सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई अपील के बाद जोर पकड़ गया। अपील में कोर्ट से 2021 के सड़क चौड़ीकरण संबंधी आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया गया था।

इकोलॉजिकल डैमेज की चेतावनी

सिविल सोसायटी सदस्यों ने चेतावनी दी है कि बिना उचित सेफगार्ड्स के चौड़ीकरण से BESZ में ऐसा पारिस्थितिक नुकसान होगा, जिसे वापस नहीं सुधारा जा सकेगा। उन्होंने हाल ही में धराली में आई बाढ़ का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह हादसा हिमालयी क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण के खतरों की याद दिलाता है।

बैठक में यह चिंता भी उठाई गई कि राज्य वन विभाग ने BESZ के भीतर 20.6 किमी सड़क चौड़ीकरण हेतु 42 हेक्टेयर वनभूमि को गैर-वानिकी उपयोग के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।

‘हिमालय सुरक्षित, तो देश सुरक्षित’

दिल्ली से वर्चुअल संबोधन में वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि आंदोलन राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध नहीं है। “देश तभी सुरक्षित है जब हिमालय सुरक्षित है। इसका विकास, सुरक्षा और संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े तत्व हैं”, उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हिमालय पूरे देश की जिम्मेदारी है, केवल उत्तराखंड की नहीं।

आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल और कई सामाजिक कार्यकर्ता भी आंदोलन में शामिल रहे।

स्थानीय निवासियों का काउंटर प्रदर्शन

दूसरी ओर धराली और आसपास के ग्रामीणों ने आंदोलन के खिलाफ कलेक्ट्रेट में काउंटर-प्रोटेस्ट किया। उनका आरोप है कि पर्यावरण समूहों के विरोध की वजह से उत्तरकाशी से भैरोंघाटी तक गंगोत्री हाईवे का चौड़ीकरण रुक गया है, जो चार धाम यात्रा, स्थानीय जनता और सीमावर्ती सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि “कनेक्टिविटी बाधित होने पर विकास और सुरक्षा, दोनों प्रभावित होंगे।”

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