सोनम वांगचुक: सलाखों के पीछे ‘साइंटिस्ट’ का दिमाग, चींटियों से सीख रहे आजादी का पाठ
जोधपुर। जोधपुर केंद्रीय जेल में बंद लद्दाख के प्रसिद्ध क्लाइमेट एक्टिविस्ट और मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने जेल की बैरकों को अपने नवाचार प्रयोग का केंद्र बना लिया है। 119 दिनों से सलाखों के पीछे कैद यह वैज्ञानिक अब चींटियों के व्यवहार और टीम वर्क से सीख लेकर जेल की संरचना को इको-फ्रेंडली बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
जेल में वैज्ञानिक प्रयोग:
वांगचुक ने बैरक में चींटियों पर आधारित किताब ‘एंट्स: वर्कर्स ऑफ द वर्ल्ड’ मंगवाई है और उनकी गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रशासन से थर्मामीटर की मांग की है ताकि बैरकों के तापमान और वास्तुकला का अध्ययन कर पर्यावरण अनुकूल (इको-रिस्पॉन्सिव) बदलाव किया जा सके।
NSA के तहत हिरासत:
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया ...










