ताशकंद की ‘काली रात’: शांति समझौता या पीएम शास्त्री के खिलाफ गहरी साजिश? अधूरी जांच और गायब सबूत
नई दिल्ली: 10 जनवरी 1966 का दिन भारतीय राजनीति और इतिहास में एक ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। 1965 की भारत–पाकिस्तान युद्ध के बाद ताशकंद में शांति समझौता हुआ, लेकिन कुछ घंटे बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का रहस्यमय निधन इस समझौते की खुशी को मात दे गया।
ताशकंद समझौता: शांति की राह
1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के बाद सोवियत संघ ने मध्यस्थता करते हुए दोनों देशों को ताशकंद बुलाया। 4 से 10 जनवरी 1966 तक चली वार्ता के बाद 10 जनवरी को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
समझौते के अनुसार दोनों देशों की सेनाएँ युद्ध से पहले की स्थिति में लौटेंगी।
दोनों देश आपसी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
युद्धबंदियों की रिहाई और द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की जिम्मेदारी दोनों नेताओं को सौंपी गई।
समझौते पर हस्ताक्षर भारत के राष्ट्रपति लाल बहादुर शास...










