Saturday, January 10

AI और विज्ञान में नई क्रांति: LLM की मदद से खोजे जाएंगे अनसुलझे सवाल

नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026: विज्ञान और तकनीक की दुनिया में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सौरमंडल में नौवें ग्रह की खोज हो सकती है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से नई वैज्ञानिक खोजें संभव होंगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा। इसके साथ ही सेल्फ हीलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए निर्माणाधीन ढांचों का नुकसान कम किया जा सकेगा।

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नए ग्रह की खोज:
प्लूटो से ग्रह का दर्जा छीनने के बाद सौरमंडल का सबसे दूरवर्ती ग्रह नेप्च्यून ही माना जाता था। लेकिन दिसंबर 2025 में जापानी खगोलशास्त्रियों ने इन्फ्रारेड इमेजिंग वाले सैटेलाइट्स की पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके पाया कि कोई वस्तु अपनी जगह से हटी हुई है। धरती के 7 से 17 गुना वजन वाली यह बर्फीली चीज सौरमंडल का नवां ग्रह हो सकती है।

AI एजेंट्स से विज्ञान में छलांग:
AI एजेंट्स यानी वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बनाए गए प्रोग्राम, जो कई लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM) की मदद से जटिल और अनसुलझे सवालों के भरोसेमंद उत्तर खोज सकते हैं। भारत समेत कई देशों में इस दिशा में काम जारी है और 2026 तक वैज्ञानिक खोजों में AI की भूमिका महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।

कार्बन उत्सर्जन पर अंकुश:
2035 तक कार्बन उत्सर्जन को आधा करने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन 2025 में सौर और पवन ऊर्जा से उतनी ही बिजली बनी जितनी कोयले और गैस से। चीन ने अपने उत्सर्जन को रोककर इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

सौर ऊर्जा में नई तकनीक:
पेरोस्काइट नामक केमिकल के लेप से सौर ऊर्जा उत्पादन में अब सफलता मिली है। टैडेम सेल्स 34 प्रतिशत से अधिक क्षमता से बिजली उत्पादन कर सकते हैं, और इसके साथ दो सुरक्षित और सस्ती बैटरियों का विकास भी हुआ है।

क्वांटम कंप्यूटिंग और फ्यूजन एनर्जी:
जर्मनी में 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस वाला फ्यूजन प्लाज्मा आधा घंटे तक स्थिर रखा गया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट की मायोराना-1 क्वांटम चिप को क्रांतिकारी पहल माना गया। आने वाले समय में क्वांटम कंप्यूटर विज्ञान और ऊर्जा क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोलेंगे।

सेल्फ हीलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर:
अब बड़े पुल, इमारत या पाइपलाइन की छोटी-मोटी दरारों को सेल्फ हीलिंग मटीरियल और IoT तकनीक की मदद से जल्दी ठीक किया जा सकता है। इससे हर साल होने वाले लाखों करोड़ डॉलर के नुकसान को कम किया जा सकेगा।

चंद्र अभियानों में तेजी:
साल 2026 नासा के आर्टेमिस 2 मिशन और चीन के चांग -7 मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। नासा अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर भेजेगा, जबकि चीन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी तलाशने की योजना में है। भारत का गगनयान मिशन भी इसी साल रोबॉट सवार अंतरिक्ष उड़ान के जरिए मानव अंतरिक्ष यात्रा के प्रभावों का अध्ययन करेगा।

विज्ञान और तकनीक के इन नवीनतम प्रयोगों से आने वाले वर्षों में न केवल पृथ्वी बल्कि अंतरिक्ष की खोज में भी नए आयाम खुलने की उम्मीद है।

 

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