
नई दिल्ली, 11 जनवरी 2026: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में निधन हुआ था। सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति के प्रतीक शास्त्री जी ने अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली राजनीतिक जीवन में देश को अनुशासन और एकजुटता का पाठ पढ़ाया।
शास्त्री जी ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खाद्य संकट से निपटने के लिए देशवासियों से “सप्ताह में एक दिन भोजन न करने” का आह्वान किया। उनके इस प्रेरक कदम पर लाखों भारतीयों ने अपने हिस्से का योगदान देकर देश के सामने एकजुटता और त्याग का उदाहरण प्रस्तुत किया।
शास्त्री जी का प्रसिद्ध कथन है:
“अनुशासन और एकजुट कार्रवाई ही देश के लिए वास्तविक शक्ति का स्रोत है।”
इसका अर्थ था कि नागरिक न केवल अपने अधिकारों को समझें, बल्कि अपने कर्तव्यों को भी निभाएं। साथ ही, देशवासियों को जाति, धर्म, भाषा या राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट होना चाहिए। उनका मानना था कि बिखरा हुआ समाज कमजोर होता है, लेकिन संगठित और एकजुट समाज किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है।
आज जब भारत सामाजिक तनाव, वैश्विक दबाव और आर्थिक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, शास्त्री जी के ये विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। यदि नागरिक अनुशासित हों और देशहित में एकजुट होकर काम करें, तो देश की शक्ति स्वतः बढ़ जाएगी।
शास्त्री जी के पांच प्रेरक विचार:
- अनुशासन और एकजुट कार्रवाई ही देश के लिए वास्तविक शक्ति का स्रोत है।
- जय जवान, जय किसान।
- देश सेवा में सबसे बड़ा धर्म है।
- सादगी, ईमानदारी और त्याग ही नेतृत्व की पहचान हैं।
- कठिन समय में भी साहस और धैर्य बनाए रखें।
जय जवान, जय किसान का नारा आज भी भारत की आत्मा में गूंजता है। शास्त्री जी ने सत्ता को कभी अधिकार नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनके जीवन, संघर्ष और आदर्श आज भी हमें देशभक्ति, अनुशासन और एकजुटता की प्रेरणा देते हैं।
इस 11 जनवरी को देश उन्हें नमन करता है और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।