
नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026: अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक के हालिया बयान ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई कड़वाहट पैदा कर दी है। लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में सीधे तौर पर भारत को व्यापार समझौते में देरी का जिम्मेदार ठहराया, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बहस तेज हो गई है।
भारत की हिचकिचाहट पर ट्रंप की नाराजगी:
लुटनिक के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच समझौता लगभग तैयार था, लेकिन नई दिल्ली की हिचकिचाहट और असहजता के कारण डील परवान नहीं चढ़ सकी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करना चाहिए था, जिन्हें इस सौदे का ‘अल्टीमेट क्लोजर’ माना गया। लुटनिक के बयान ने संकेत दिए हैं कि ट्रंप के व्यक्तिगत अहंकार और नाराजगी के चलते भारत-अमेरिका रिश्तों में अनिश्चितता बढ़ रही है।
भारत ने अपने रुख़ को स्पष्ट किया:
भारत ने लुटनिक के दावों को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताया और कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
अन्य वैश्विक उदाहरण:
लुटनिक ने वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस के साथ अमेरिका के हालिया समझौतों का हवाला दिया। अमेरिका वियतनाम और फिलीपींस के साथ 2025 में ही डील कर चुका है, जबकि भारत की स्थिति अलग रही।
संबंधों में बढ़ती अनिश्चितता:
व्यापार के अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयानों ने भी भारत-अमेरिका संबंधों में अनिश्चितता बढ़ाई है। इसमें भारत की रूसी तेल खरीद और अमेरिकी उच्च टैरिफ पर नाराजगी शामिल है। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर ट्रंप के सामने झुकने का आरोप लगाया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखी है।
आगे की राह:
अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप का व्यक्तिगत अहंकार बड़े व्यापारिक समझौते के रास्ते में आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत को ऐसे बयानों के लिए नपी–तुली कूटनीति अपनानी होगी—जहां बातचीत के दरवाजे खुले रहें, लेकिन राष्ट्रीय हितों पर कोई आंच न आए।