Wednesday, July 15

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दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान का शुभारंभ, 31 अगस्त तक घर-घर होगी बच्चों की स्वास्थ्य जांच

सीएमएचओ ने बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाकर किया अभियान का शुभारंभ, लगभग 2.92 लाख बच्चों की होगी स्क्रीनिंग

जबलपुर। शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने, एनीमिया एवं कुपोषण की रोकथाम तथा बाल्यकालीन गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले में ‘दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान’ का शुभारंभ मंगलवार को शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मनमोहन नगर से किया गया। अभियान का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. नवीन कोठारी ने बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाकर किया।

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यह विशेष अभियान 14 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की दस्तक टीमें घर-घर पहुंचकर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) करेंगी। बच्चों को विटामिन-ए की खुराक देने के साथ ही दस्त रोग की रोकथाम के लिए ओआरएस के पैकेट एवं जिंक की गोलियों का भी निःशुल्क वितरण किया जाएगा।

अभियान के शुभारंभ अवसर पर सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने कहा कि दस्तक अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण, एनीमिया एवं अन्य गंभीर बाल्यकालीन बीमारियों की शीघ्र पहचान कर उन्हें समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि शिशु एवं बाल मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके।

उन्होंने बताया कि जिले में इस अभियान के तहत लगभग 2 लाख 92 हजार 395 बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दस्तक दल पूरी सक्रियता के साथ प्रत्येक घर तक पहुंचकर पांच वर्ष तक के बच्चों की जांच करेंगे तथा उन्हें विटामिन-ए की खुराक उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि विटामिन-ए बच्चों की आंखों की रोशनी बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने तथा स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष अभियान को तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त बनाया गया है। पहली बार डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) टूल का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक बच्चे की स्क्रीनिंग और रेफरल की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जाएगी।

उन्होंने बताया कि डीएसएस टूल के माध्यम से अति कुपोषित एवं गंभीर रूप से बीमार बच्चों की पहचान अधिक सटीकता से हो सकेगी। स्वास्थ्य कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अथवा उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर सकेंगे, जिससे उन्हें बिना किसी विलंब के समुचित उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस तकनीक से मानवीय त्रुटियों की संभावना भी काफी हद तक समाप्त होगी।

अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में संस्था प्रभारी डॉ. अंशुल शुक्ला, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विनोद गुप्ता, जन आरोग्य समिति के भोले शंकर सोनी, संभागीय समन्वयक निहार दीवान, डीपीएम डॉ. उपेन्द्र सिंह कुशवाहा, डेटा आरआई मैनेजर विजय पाण्डेय, डीसीएम सुश्री दीपिका साहू, यूएनडीपी से अतुल करकरे एवं एपिडेमियोलॉजिस्ट सहित स्वास्थ्य विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य विभाग ने जिले के अभिभावकों से अपील की है कि वे दस्तक दल का सहयोग करें और 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच, विटामिन-ए की खुराक तथा ओआरएस एवं जिंक वितरण का पूरा लाभ उठाएं, ताकि बच्चों को कुपोषण, दस्त एवं अन्य गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।

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