
ओटावा/नई दिल्ली: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी इस हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं। उनका दौरा गुरुवार को मुंबई से शुरू होगा और इसके बाद वे जापान व ऑस्ट्रेलिया जाएंगे। गौरतलब है कि ये तीनों देश QUAD पार्टनर्स हैं, जिसमें चौथा देश अमेरिका है। इसीलिए कार्नी के दौरे को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह रणनीति अमेरिका को संदेश देने के लिए तैयार की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति “QUAD-माइनस-वन” कहलाती है। ब्राह्मा चेलानी, जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट, लिखते हैं कि कार्नी जानबूझकर अमेरिका को नजरअंदाज करते हुए भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ गहरे संबंध स्थापित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य कनाडा को अमेरिकी दबदबे से स्वतंत्र कर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे में अपनी भूमिका सुनिश्चित करना है।
खालिस्तान समर्थकों पर भी भारत की चिंता पर चर्चा
भारतीय राजदूत दिनेश के पटनाइक ने बताया कि दौरे के दौरान खालिस्तान समर्थकों के मुद्दे पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि कनाडा अब भारत की चिंताओं को पहले से बेहतर समझ रहा है और दोनों देशों ने मिलकर इस दिशा में कार्रवाई का फ्रेमवर्क तैयार किया है।
क्वाड पर संदेश
ब्राह्मा चेलानी ने लिखा है कि कार्नी का यह दौरा इस बात का संकेत है कि कनाडा निर्भरता से लचीलेपन की ओर बढ़ना चाहता है। इस रणनीति से अमेरिका के दबदबे को कम करते हुए कनाडा वैश्विक पावर टेबल पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
पीएम कार्नी का बयान
कनाडाई प्रधानमंत्री के कार्यालय ने बयान जारी किया कि “ज्यादा बंटी और अनिश्चित दुनिया में, हमारी नई सरकार फोकस कर रही है कि हम क्या कंट्रोल कर सकते हैं। हम अधिक मजबूत, स्वतंत्र और लचीली इकॉनमी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। विदेश में हमारे ट्रेड और निवेश के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि “26 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान का दौरा करेंगे। इस दौरान ट्रेड, एनर्जी, टेक्नोलॉजी और डिफेंस में नए मौके खोले जाएंगे और हमारे इंडो-पैसिफिक पार्टनर्स के साथ क्षेत्रीय रिश्तों को और मजबूत किया जाएगा।”
कार्नी का यह दौरा न केवल कनाडा-इंडो-पैसिफिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि अमेरिका को भी यह संकेत देगा कि वैश्विक शक्ति संतुलन में कनाडा अपनी भूमिका पर स्वतंत्र और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने को तैयार है।
