

जेनेवा: अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को तेजी से बढ़ा रहा है और जल्द ही अमेरिका को चुनौती दे सकता है। अमेरिकी अधिकारीयों ने बीजिंग से भविष्य की हथियार नियंत्रण संधि में शामिल होने की अपील की है।

अमेरिका के आर्म्स कंट्रोल और नॉनप्रोलिफरेशन के असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर येव ने जेनेवा में डिसआर्मामेंट सम्मेलन में कहा कि चीन ने अपने परमाणु हथियारों का जखीरा गुप्त रूप से और बिना किसी पारदर्शिता के बढ़ाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो अगले 4-5 साल में चीन अमेरिका के बराबर पहुंच सकता है।
येव ने कहा कि चीन 2030 तक 1000 से अधिक न्यूक्लियर वारहेड के लिए पर्याप्त फिसाइल मटीरियल जुटा सकता है। उन्होंने New START संधि की कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसमें चीन द्वारा तेजी से हथियार निर्माण और पारदर्शिता की कमी का कोई प्रावधान नहीं था।
चीन का पलटवार
चीनी राजदूत शेन जियान ने अमेरिकी आरोपों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि चीन किसी भी देश के साथ न्यूक्लियर हथियारों की रेस में शामिल नहीं होगा और किसी भी देश द्वारा उसकी न्यूक्लियर नीति को तोड़-मरोड़कर पेश करने का वह विरोध करता है।
New START संधि और उसका खत्म होना
New START संधि अमेरिका और रूस के बीच थी, जिसने दोनों देशों को 1550 न्यूक्लियर वारहेड तक सीमित किया था। यह संधि 5 फरवरी को समाप्त हो गई। संधि के खत्म होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर हथियार रखने वाले देशों के बीच कोई सीमित नियंत्रण नहीं बचा।
असिस्टेंट सेक्रेटरी येव ने संधि के खत्म होने का बचाव करते हुए कहा कि रूस के कथित उल्लंघनों के कारण अब सीमा की आवश्यकता नहीं रही और इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भविष्य में बेहतर समझौते का अवसर मिलेगा।


