
बड़वानी (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में शुक्रवार से कक्षा 5 की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गईं, लेकिन बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड के खेड़ी फलिया की 82 बच्चों के लिए यह दिन सुखद नहीं रहा। घने जंगल, दुर्गम रास्ते और जंगली जानवरों के डर के कारण ये बच्चे पूरे साल स्कूल तक नहीं जा पाए।
गांव और बच्चों की स्थिति
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खेड़ी फलिया में लगभग 40 परिवार निवास करते हैं और यहां 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 82 बच्चे हैं।
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बच्चों के पास स्कूल बैग और किताबों की जगह दिनभर जंगल में मवेशी चराना, खेती-किसानी में मदद करना या पारंपरिक खेल खेलना ही प्राथमिक गतिविधि है।
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नजदीकी प्राथमिक स्कूल लगभग 4 किलोमीटर दूर है, लेकिन रास्ता घने जंगल और नालों से होकर गुजरता है।
ग्रामीण मोहन और किराशा का कहना है कि बरसात के मौसम में यह मार्ग और भी असुरक्षित हो जाता है। कई बच्चे कभी स्कूल में नामांकित ही नहीं हुए, जबकि कुछ ने दूरी और जोखिम के कारण पढ़ाई छोड़ दी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
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पाटी विकासखंड के बीआरसी दिनेश चौहान ने बताया कि 18 फरवरी को जिला परियोजना समन्वयक को रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें बच्चों के शिक्षा से वंचित होने का उल्लेख था।
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बच्चों को बोकराटा आश्रम स्कूल में शिक्षा जारी रखने का विकल्प दिया गया था, लेकिन सुरक्षा और स्थानीय स्कूल की मांग के चलते अभिभावक इसे स्वीकार नहीं कर पाए।
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प्रभारी जिला परियोजना समन्वयक अशरफ खान ने कहा कि वार्षिक कार्ययोजना में बच्चों के लिए परिवहन सुविधा देने का प्रस्ताव शामिल किया जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीण अब प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि खेड़ी फलिया के 82 बच्चों को प्राथमिक शिक्षा का अधिकार मिले, ताकि वे नियमित कक्षाओं में शामिल होकर अपना भविष्य संवार सकें।
मुख्य बिंदु
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बड़वानी के खेड़ी फलिया में 82 बच्चे स्कूल न जाने के कारण बोर्ड परीक्षा से वंचित।
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स्कूल तक दूरी 4 किमी है, रास्ता घने जंगल और नालों से होकर गुजरता है।
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माता-पिता सुरक्षा के कारण बच्चों को घर पर ही रखते हैं।
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शिक्षा विभाग के बार-बार अनुरोध के बावजूद अभी तक गांव में प्राथमिक स्कूल नहीं खुला।
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प्रशासन ने आश्रम स्कूल का विकल्प दिया, लेकिन अभिभावक ने सुरक्षा कारणों से उसे अस्वीकार किया।
