
पटना: बिहार में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव 2026 में इस बार 5वीं सीट को लेकर सबसे ज्यादा सियासी गहमागहमी देखने को मिल रही है। पहले चार सीटों के मामले में NDA और महागठबंधन अपने-अपने उम्मीदवार आराम से भेज देंगे, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर पूरा खेल AIMIM के हाथ में है।
NDA की स्थिति
बीजेपी और JDU अपने विधानसभा सदस्यों के वोटों से पहले चार सीटें निर्विरोध जीत लेंगे। लेकिन पांचवीं सीट के लिए इनके पास सिर्फ 10 विधायकों के वोट बचेंगे। चिराग पासवान की लोजपा (19), जीतन राम मांझी की हम (5) और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो (4) को मिलाकर भी कुल संख्या 38 होगी। इसके बाद भी 41 में से 3 वोटों की कमी रहेगी।
महागठबंधन की चुनौती
तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास राजद, कांग्रेस, लेफ्ट और IIP मिलाकर कुल 35 सीटें हैं। पांचवीं सीट जीतने के लिए उन्हें AIMIM के 5 विधायकों और रामगढ़ के सतीश सिंह यादव (बीएसपी) का समर्थन जरूरी होगा।
AIMIM का दांव
असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM की मंशा सिर्फ 5वीं सीट जीतने की नहीं है। उनका उद्देश्य है दोनों गठबंधनों को संतुलन दिखाना और यह जताना कि उनके पांच विधायक कितनी ताकत रखते हैं। AIMIM खेल बिगाड़ने और अपने राजनीतिक महत्व को दिखाने के लिए मैदान में उतरी है।
दोनों गठबंधनों की रणनीति
महागठबंधन और NDA दोनों ही स्थिति का आकलन कर रणनीति बना रहे हैं। महागठबंधन AIMIM और बीएसपी के साथ हाथ मिलाकर अपनी जरूरत पूरी करना चाहता है। NDA के सूत्रों का कहना है कि अगर विपक्ष के 3 विधायक विकास के नाम पर उनके साथ आते हैं तो उनकी सीट पक्की हो जाएगी।
5वीं सीट का यक्ष प्रश्न
राज्यसभा चुनाव में 5वीं सीट को लेकर तिकड़ी बनाम सिक्सर की जंग है। एक गठबंधन जोड़-तोड़ का सहारा लेना चाहता है, जबकि दूसरा सीधे मैदान जीतने का प्रयास कर रहा है। 16 मार्च को ही इसका पूरा खेल सामने आएगा और पता चलेगा कि ‘बंगले की चाबी’ आखिरकार AIMIM की मुट्ठी में कितनी कामयाब रहती है।
