Tuesday, February 17

भिवाड़ी ब्लास्ट: ताले के पीछे ‘बारूद’ का खूनी खेल, जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं

भिवाड़ी: खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को हुए भीषण धमाके ने प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में सात मजदूरों की मौत हुई, जबकि जांच से पता चला कि कागजों में ‘रेडिमेड गारमेंट’ दर्ज इस फैक्ट्री में महीनों से अवैध बारूद का कारोबार चल रहा था।

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घटना के 24 घंटे बीत जाने के बावजूद किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न होना मिलीभगत की आशंका को और मजबूत करता है। सवाल यह उठता है कि नाक के नीचे महीनों से चल रहा यह मौत का कारोबार आखिर किसकी शह पर फल-फूल रहा था।

कागजों में कपड़े, भीतर खतरनाक बारूद

रीको रिकॉर्ड के मुताबिक, 600 गज का यह प्लॉट साल 2005 में राजेंद्र कुमार को आवंटित हुआ था। 2011 में यहां ‘रेडिमेड गारमेंट’ के उत्पादन का सत्यापन भी कराया गया। लेकिन खेल तब शुरू हुआ जब 2019 में इसे हेमंत शर्मा को किराये पर दे दिया गया। हेमंत ने आगे इसे अभिनंदन तिवारी को रेंट पर दे दिया। रीको को केवल प्लॉट किराये पर देने की सूचना दी गई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि यहां सिलाई मशीनों की जगह बारूद कूटा जाएगा।

लॉकडाउन वाला ‘ताला’ और सीक्रेसी का खेल

फैक्ट्री प्रबंधन ने इसे बाहरी दुनिया से छिपाने के लिए चालाकी से योजना बनाई। पड़ोसियों और अन्य लोगों को भनक न लगे, इसलिए फैक्ट्री के गेट पर हमेशा ताला लटका रहता। न तो कोई मजदूर अंदर जाते देखा गया और न बाहर आते। यहां चाइनीज गन में इस्तेमाल होने वाले बारूद वाले ‘कैप्सूल’ बनाए जा रहे थे, जिन्हें चुपके से दिल्ली सप्लाई किया जाता था।

24 घंटे बाद भी प्रशासन ‘सोता’ रहा

इतनी बड़ी औद्योगिक बेल्ट में एक महीने से बारूद और केमिकल का जखीरा जमा था, लेकिन भिवाड़ी पुलिस, रीको प्रशासन और जिला प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। क्या यह केवल लापरवाही है या महीनों की मिलीभगत का परिणाम? बिना पुलिस और प्रशासन की मदद के औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की अवैध गतिविधियां संभव नहीं हैं।

फिलहाल, हेमंत और अभिनंदन लगातार जगह बदलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम देते रहे हैं, और प्रशासन अब भी किसी ठोस कार्रवाई के बजाय जांच की प्रतीक्षा कर रहा है।

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