
मुंबई, 17 फरवरी 2026: बॉलीवुड के युवा अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी इन दिनों अपनी फिल्म ‘दो दीवाने सहर में’ को लेकर चर्चा में हैं। यह फिल्म एक नए जमाने की देसी लव स्टोरी है और 20 फरवरी 2026 को रिलीज़ हो रही है। नवभारत टाइम्स से खास बातचीत में सिद्धांत ने अपने पहले प्यार, पहले किस, ब्रेकअप और परिवार के शादी के दबाव पर खुलकर बातचीत की।
यूपी के बलिया में जन्मे सिद्धांत ने बताया कि उनका पहला इन्फैचुएशन चौथी क्लास में हुआ। उन्होंने कहा, “दिल्ली से आई एक लड़की मेरे बगल में बैठती थी। मैं देखते ही उस पर मोहित हो गया, लेकिन वह साल भर में चली गई। उसने जाते समय कहा था कि वह वापस आएगी, लेकिन वह कभी नहीं आई। मेरा बचपन का पहला प्यार अधूरा रह गया।”
सिद्धांत ने प्यार में रिजेक्शन का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा, “कई बार प्यार में नकारा गया हूं। बचपन में क्लास में प्रपोज करते हुए मेरी बहुत बेइज्जती हुई। एक्टर बनने के बाद भी रिजेक्शन का सामना किया। प्यार को लेकर मैं फ्रंटल अप्रोच नहीं करता। अब समझ आता है कि जो मेरे लिए लड़ सके और अडिग खड़ा रहे, वह बेहद दुर्लभ है। मैंने यह अपने माता-पिता में देखा।”
ऑटो में पहला रोमांटिक किस
सिद्धांत ने अपनी पहली किस का अनुभव साझा करते हुए बताया, “मैं 19 साल का था। हल्की बारिश हो रही थी। मैं और वह ऑटो में थे। जन्मदिन था और मुझे उसे घर ड्रॉप करना था। वह मेरे कंधे पर सो गई। अगले दिन जब मिले, तो मैं बहुत शरमा गया। हमारा पहला किस डेटिंग के एक साल बाद हुआ। एक बार तो ट्रैफिक पुलिस ने भी पकड़ लिया था। उस सिचुएशन को संभालने के लिए पहली बार रिश्वत देनी पड़ी।”
परिवार का शादी का दबाव
सिद्धांत ने कहा, “हमारे समाज में लड़कियों पर ज्यादा शादी का दबाव माना जाता है, लेकिन मुझ पर भी घर से दबाव है। मां रोज कहती हैं- पापा ऑफिस चले जाते हैं, तुम शूटिंग पर जाते हो, भाई कॉलेज में है, तो तुम शादी कर लो। मैंने मां से कहा, 6-8 साल रुकिए। उन्हें लगता है कि वे बूढ़े हो गए हैं, और उनके बाद मेरा क्या होगा। मैंने उन्हें जिम लगवा दिया और कहा, लंबी पारी खेलिए, चिंता मत कीजिए।”
जीवनसाथी की उम्मीद
सिद्धांत कहते हैं, “ऐसा जीवनसाथी चाहिए जिसके साथ हंसू और रोऊं। जिंदगी में सुख-दुख बांट सकूं। मुझे अपने मम्मी-पापा जैसी कंपैनियनशिप चाहिए। हाल ही में उनके एनिवर्सरी पर उन्हें काठमांडू ट्रिप पर भेजा। मां अपनी शादी की यादें ताजा कर रही थीं। यह देखकर मुझे एहसास हुआ कि परिवार सबसे बड़ी पूंजी है।”
सिद्धांत चतुर्वेदी की यह बातचीत दर्शाती है कि वह सिर्फ बड़े पर्दे के हीरो नहीं, बल्कि भावनाओं को समझने और रिश्तों में गहराई रखने वाले इंसान भी हैं।
