
नई दिल्ली: अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ हालिया ट्रेड डील के बाद भारत सरकार चीन से आने वाले निवेश को लेकर बड़ी छूट देने की योजना पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार प्रेस नोट 3 की समीक्षा कर रही है और इसके तहत विदेशी निवेश के ऑटोमेटिक अप्रूवल के लिए न्यूनतम सीमा निर्धारित की जा सकती है।
क्या है प्रेस नोट 3
प्रेस नोट 3 अप्रैल 2020 में लागू किया गया था। इसके तहत उन देशों से आने वाले विदेशी निवेश (FDI) के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य है, जिनकी सीमा भारत से लगती है। यह कदम कोरोना काल में घरेलू कंपनियों को विदेशी टेकओवर, खासकर चीन से, बचाने के लिए उठाया गया था।
छोटे निवेश को आसान बनाने की योजना
सरकारी सूत्रों का कहना है कि अब न्यूनतम सीमा तय करने की समीक्षा की जा रही है। इस सीमा से नीचे के निवेश को ऑटोमेटिक अप्रूवल मिल सकता है। इसका उद्देश्य छोटे निवेशकों के लिए अनुपालन का बोझ कम करना और फंडिंग प्रक्रिया को तेज बनाना है। खासकर उन सेक्टर्स में जहां तुरंत फंडिंग की जरूरत है और संवेदनशील तकनीक का मामला नहीं है।
यदि यह सीमा लागू होती है, तो छोटे निवेश के लिए गृह और विदेश मंत्रालय की मंजूरी जरूरी नहीं होगी। यह सीमा प्रतिशत स्टेक या मौद्रिक वैल्यू दोनों के आधार पर तय की जा सकती है।
सुरक्षा और सतर्कता बनी रहेगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रेस नोट 3 को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाएगा। देश में आने वाले हर निवेश पर सतर्क निगरानी जारी रहेगी ताकि किसी भी क्रिटिकल सेक्टर में जबरन टेकओवर न हो।
भारत-चीन रिश्तों में गर्मजोशी
इस समीक्षा के समय भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की भी खबर है। दोनों देशों के मंत्रियों और अधिकारियों का आपसी दौरा शुरू हुआ है। सीधी उड़ानों और टूरिस्ट वीज़ा की अनुमति पर सहमति बन चुकी है। सीमा विवाद पर बातचीत का सिलसिला भी तेज हुआ है। इसके अलावा अमेरिका और चीन के बीच हालिया टैरिफ विवाद के बाद भारत-चीन के आर्थिक रिश्तों में नजदीकी बढ़ी है।
