
अमेरिका पढ़ने जा रहे छात्रों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वहां उनका रहने का इंतजाम कैसे होगा। सही हाउसिंग विकल्प चुनने से न सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देने में आसानी होती है, बल्कि नए देश में घर जैसी सुविधा और सोशल लाइफ का अनुभव भी बेहतर बनता है।
ऑन-कैंपस हाउसिंग:
कंपस के भीतर रहने को ऑन-कैंपस हाउसिंग कहा जाता है। ज्यादातर विदेशी छात्र इसे प्राथमिकता देते हैं। इसके प्रमुख फायदे हैं:
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ज्यादा लोगों से मिलना-जुलना
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क्लास में आसानी से शामिल होना
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मनोरंजन और सुविधाओं का नजदीकी एक्सेस
ऑन-कैंपस रहने पर छात्रों को हॉस्टल या डॉर्म रूम मिलता है। अक्सर एक रूम में एक या दो छात्र साथ रहते हैं और बाथरूम, लॉन्ड्री और किचन साझा करते हैं। कई यूनिवर्सिटीज़ में फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए हॉस्टल में रहना अनिवार्य होता है।
कुछ यूनिवर्सिटीज़ में ऑन-कैंपस अपार्टमेंट का विकल्प भी होता है। अपार्टमेंट में अधिक प्राइवेसी और ज्यादा स्पेस मिलता है। हालांकि यह हॉस्टल रूम से थोड़ा महंगा होता है।
ऑफ-कैंपस हाउसिंग:
ऑफ-कैंपस का मतलब है कि छात्र कॉलेज कैंपस के बाहर रहते हैं। इसके दो मुख्य विकल्प हैं:
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अपार्टमेंट – छात्रों को अधिक स्वतंत्रता मिलती है, लेकिन खाना, साफ-सफाई और बिल का ख्याल खुद रखना पड़ता है।
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घर किराए पर लेना – फ्लेक्सिबिलिटी ज़्यादा होती है, लेकिन जिम्मेदारी भी काफी बढ़ जाती है।
अधिकतर छात्र सेकेंड या थर्ड ईयर में ऑफ-कैंपस हाउसिंग चुनते हैं। कभी-कभी कई छात्र मिलकर घर किराए पर लेते हैं ताकि खर्च साझा हो सके।
होमस्टे विकल्प:
होमस्टे में छात्रों को यूनिवर्सिटी के पास किसी अमेरिकी परिवार के साथ रखा जाता है। इसके फायदे हैं:
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अमेरिकी संस्कृति को करीब से समझना
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अंग्रेज़ी बोलने में सुधार
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घर की याद कम लगना
इस प्रकार, अमेरिका में छात्रों के पास हॉस्टल, अपार्टमेंट, घर या होमस्टे जैसे विकल्प मौजूद हैं। फ्लाइट बुक करने और कॉलेज में दाखिला लेने से पहले इन विकल्पों पर विचार कर लेना चाहिए, ताकि पढ़ाई और रहने का अनुभव सहज और सुखद हो।
