
नई दिल्ली। विंटर ओलंपिक्स 2026 में भारत के एथलीटों की अनुपस्थिति के बावजूद, जॉर्जिया की रूसी मूल की फिगर स्केटर अनास्तासिया गुबानोवा ने भारतीय सांस्कृतिक रंग बिखेरकर पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने अपने प्रदर्शन में हिंदू थीम और भारतीय संगीत का अनोखा मिश्रण पेश किया, जिसने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया बल्कि भारतीय संस्कृति का वैश्विक मंच पर प्रतिनिधित्व भी किया।
मैदान में भारत नहीं, पर गूंजा भारतीय संगीत
इटली में आयोजित इन खेलों में भारत ने फिगर स्केटिंग में कोई प्रतिभागी नहीं उतारा था। लेकिन जब अनास्तासिया बर्फ पर उतरीं, तो उन्होंने अपनी रूटीन में भारतीय वाद्ययंत्रों और हिंदू संस्कृति से प्रेरित संगीत का चयन किया। उनकी प्रस्तुति में माथे पर बिंदी का भी विशेष सजावटी तत्व था, जो बेहद आकर्षक लग रहा था। उन्होंने ‘ना दे दिल परदेशी नू’ गाने पर परफॉर्म कर दर्शकों का मन मोह लिया।
सांस्कृतिक सीमाओं से परे कला का प्रदर्शन
विशेषज्ञों का कहना है कि अनास्तासिया की यह पसंद केवल भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान नहीं दर्शाती, बल्कि यह बताती है कि खेल किस तरह सीमाओं को तोड़कर देशों को जोड़ सकते हैं। भले ही वह आधिकारिक तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही थीं, लेकिन उनके प्रदर्शन ने वैश्विक मंच पर भारतीय विरासत की मौजूदगी दर्ज करा दी।
सॉफ्ट पावर और खेल बुनियादी ढांचे पर बहस
इस वीडियो ने इंटरनेट पर दो तरह की बहसें छेड़ दीं। पहला, भारतीय संस्कृति और संगीत का वैश्विक प्रभाव, और दूसरा, भारत में शीतकालीन खेलों के बुनियादी ढांचे और एथलीटों की कमी। फैंस का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हमारी संस्कृति को बढ़ावा दे सकते हैं, तो भारत को खुद इस खेल में अपने टैलेंट को आगे बढ़ाने पर निवेश करना चाहिए। अनास्तासिया की यह प्रस्तुति याद दिलाती है कि संस्कृति अपनी जगह खुद बना लेती है, चाहे स्कोरबोर्ड पर देश का नाम हो या न हो।
