
नई दिल्ली, 11 फरवरी: दिल्ली हाई कोर्ट ने बीमार मासूम बेटी के लिए उसकी मां के स्पर्श की अहमियत को ध्यान में रखते हुए धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में आरोपी एक महिला को 90 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आवेदन मंजूर करते हुए शर्त रखी कि महिला 10 हजार रुपये का पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही रकम की एक जमानती अदालत के सामने पेश करें।
कोर्ट का तर्क:
कोर्ट ने कहा कि इतनी कम उम्र के बच्चे को न सिर्फ मेडिकल केयर, बल्कि सुकून देने वाले मां के टच की भी जरूरत होती है। जस्टिस कठपालिया ने आगे कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप सीमित हैं, इसलिए बच्चे को उसकी बीमारी के समय मां के शारीरिक साथ से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामले का विवरण:
महिला राजौरी गार्डन पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 318(4)/336(3)/340(2)/338/61(2)/3(5) के तहत दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में आरोपी है। उसने अपनी दो साल की बेटी के बीमार होने के आधार पर अदालत से अंतरिम जमानत मांगी थी।
अधिवक्ता की दलील थी कि महिला पर आरोप सीमित हैं और बच्चे की देखभाल उसके अन्य रिश्तेदार भी कर सकते हैं, लेकिन हाई कोर्ट ने बच्चे के स्वास्थ्य और मानसिक सुकून को सर्वोपरि मानते हुए जमानत देने का निर्णय लिया।
