
नई दिल्ली, 10 फरवरी: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्नातक डिग्री के विवरण को सार्वजनिक किए जाने से इनकार करने वाले आदेश के खिलाफ अपील में देरी पर आपत्ति दाखिल करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को तीन हफ्ते का समय दिया है।
कोर्ट में डीयू की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि “मामले में कोई दम नहीं है” और “इसका मकसद केवल सनसनी फैलाना है।” उन्होंने अपील दाखिल करने में हुई देरी और मामले के गुण-दोष के पहलू पर जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
कोर्ट का आदेश और अगली सुनवाई
जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने कहा कि डीयू को तीन हफ्ते का समय दिया जाता है और मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। पीठ ने यह भी कहा कि मामूली देरी (15 से 45 दिन) को अदालत माफ कर सकती है।
मामले का इतिहास
दिल्ली हाई कोर्ट में 25 अगस्त 2025 के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के फैसले को रद्द कर दिया गया था। सीआईसी के फैसले के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। अपील आरटीआई कार्यकर्ता नीरज, आप नेता संजय सिंह और वकील मोहम्मद इरशाद की ओर से दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया कि केवल इसलिए कि प्रधानमंत्री एक सार्वजनिक पद पर हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उनकी सभी व्यक्तिगत जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रकट की जा सकती हैं।
