
इस्लामाबाद: पाकिस्तान वायुसेना ने अपने युद्धक क्षमता और ऑपरेशनल फुर्ती को परखने के लिए मंगलवार को ‘गोल्डन ईगल एक्सरसाइज’ किया। पाकिस्तान की सेना की मीडिया विंग ISPR ने बताया कि यह युद्धाभ्यास टू-फोर्स कंस्ट्रक्ट पर आधारित था, जिसमें AI-इनेबल्ड, नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन पर विशेष ध्यान दिया गया।
यह अभ्यास पिछले साल मई में भारत से चार दिनों तक चले संघर्ष के बाद पाक वायुसेना का पहला बड़ा युद्धाभ्यास था। उस दौरान भारत के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी वायुसेना असहाय नजर आई थी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके के 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए, जबकि पाकिस्तानी एयर डिफेंस उनकी रोकथाम में विफल रहा।
ISPR के बयान के मुताबिक, इस अभ्यास में फर्स्ट-शूट, फर्स्ट-किल स्विंग-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, लंबी दूरी की BVR एयर-टू-एयर मिसाइलें, एक्सटेंडेड-रेंज स्टैंड-ऑफ हथियार, और सटीक स्ट्राइक क्षमता वाले विमान शामिल थे। इन विमानों को एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म और एयर-टू-एयर रिफ्यूलर का समर्थन भी मिला।
पाकिस्तान के कई डिफेंस विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय मिसाइलों को रोकने में सक्षम नहीं है। इसी कारण पाकिस्तान ने हाल के महीनों में अपने ड्रोन बेड़े को तेजी से मजबूत किया और इस अभ्यास में भी ड्रोन को शामिल किया गया।
ISPR का कहना है कि यह अभ्यास बदलते रीजनल सिक्योरिटी डायनामिक्स के मद्देनजर किया गया, ताकि पाकिस्तानी वायुसेना स्मार्ट टेक्नोलॉजी और आधुनिक युद्धक रणनीति में दक्ष हो सके।
