Wednesday, February 11

तीन साल बाद थाने के मालखाने से मुक्त हुए रामलला, 6 लाख के बांड पर ‘सपरिवार’ ठाकुरबाड़ी लौटे

बक्सर। बिहार के बक्सर जिले में आस्था और श्रद्धा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। ढकाइच ठाकुरबाड़ी से चोरी हुई प्रभु श्रीराम के रामदरबार की अष्टधातु प्रतिमाएं आखिरकार तीन वर्षों के लंबे कानूनी इंतजार के बाद मुक्त हो गईं। कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को कोईलवर थाना के मालखाने से भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और हनुमान जी सहित सात प्रतिमाओं को रिहा किया गया।

This slideshow requires JavaScript.

इस दौरान थाना परिसर में श्रद्धालुओं और समाजसेवियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भावुक माहौल में रामलला की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, इसके बाद प्रतिमाओं को पूरे सम्मान के साथ ठाकुरबाड़ी वापस ले जाया गया।

21 जनवरी 2023 को हुई थी चोरी
जानकारी के अनुसार, 21 जनवरी 2023 को बक्सर जिले के ढकाइच ठाकुरबाड़ी से राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और हनुमान जी समेत सात अष्टधातु प्रतिमाओं की चोरी कर ली गई थी। चोरी के अगले दिन 22 जनवरी 2023 को पुलिस जांच के दौरान कोईलवर-बबुरा रोड पर एक स्विफ्ट डिजायर कार से सभी प्रतिमाएं बरामद कर ली गई थीं।

इस मामले में मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर थाना क्षेत्र निवासी दिलकुमार को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था। बरामदगी के बाद से ही ये प्रतिमाएं कोईलवर थाना के मालखाने में रखी गई थीं।

6 लाख के बांड पर मिली रिहाई
करीब तीन साल बाद अदालत के आदेश पर इन प्रतिमाओं को 6 लाख रुपये के बेल बांड पर मुक्त किया गया। बताया जा रहा है कि मूर्तियों की रिहाई के लिए बड़का धकाईच की सरपंच बिंदु देवी और कुसुम देवी ने संयुक्त रूप से 9 लाख रुपये का बेल बांड भरा।

60 करोड़ से अधिक आंकी गई कीमत
सूत्रों के मुताबिक बरामद अष्टधातु की इन प्रतिमाओं की कीमत लगभग 60 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। ये प्रतिमाएं ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

300 साल पुरानी बताई जा रही प्रतिमाएं
रामजानकी मठ के सचिव कन्हैया दुबे ने बताया कि मान्यता के अनुसार करीब 300 वर्ष पूर्व नेपाल के महाराजा द्वारा इन प्रतिमाओं की स्थापना कराई गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2011 में मठ से मूर्ति चोरी के दौरान पुजारी भुनेश्वर दास की हत्या कर दी गई थी। बाद में चोरी गई मूर्ति 2013 में बरामद होकर पुनः मठ में स्थापित की गई थी।

तीन साल बाद रामलला के ठाकुरबाड़ी लौटने से क्षेत्र में खुशी और श्रद्धा का माहौल है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने इसे आस्था की जीत बताते हुए मंदिर परिसर में विशेष पूजा-पाठ और आयोजन की तैयारी शुरू कर दी है।

Leave a Reply