Thursday, February 5

48 बार फेल, फिर भी सपनों को जिंदा रखा… अब संदीप बनेंगे जेल प्रहरी, हौसले की मिसाल

कुछ कहानियां सिर्फ प्रेरणा नहीं देतीं, बल्कि जुनून और धैर्य की मिसाल बन जाती हैं। राजस्थान के संदीप कुमार की कहानी भी ऐसी ही है। 2019 से लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के बावजूद 48 बार असफल होने के बाद भी संदीप ने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। अब उनकी मेहनत रंग लाई और वह जेल प्रहरी बनेंगे।

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शुरुआत: सपना सरकारी नौकरी का

संदीप कुमार राजस्थान के रहने वाले हैं। उनकी महत्वाकांक्षा सरकारी नौकरी पाने की थी। 2019 में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और तभी से उनका संघर्ष शुरू हो गया।

48 परीक्षाएं दीं, बार-बार हुए फेल

2026 तक संदीप ने 48 बार प्रतियोगी परीक्षाएं दीं। इनमें राजस्थान पुलिस, पटवारी और फॉरेस्ट गार्ड जैसी परीक्षाएं शामिल थीं। कई बार उन्होंने अच्छे नंबर भी हासिल किए, लेकिन मेरिट लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। कभी कम नंबर आए तो कभी फाइनल लिस्ट से बाहर कर दिया गया।

लेकिन संदीप ने निराशा नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और धैर्य के साथ मेहनत जारी रखी।

सपना पूरा हुआ: जेल प्रहरी बनेंगे संदीप

लगातार कोशिशों के बाद संदीप का सपना तब साकार हुआ जब उन्होंने जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा पास की। इस परीक्षा में उन्होंने 194वीं रैंक हासिल की।

उनकी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास ने आखिरकार उन्हें सफलता दिलाई।

परिवार का सहयोग और प्रेरणा

संदीप के संघर्ष के दौरान उनके परिवार का पूरा समर्थन मिला। हर बार परिवार ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। संदीप का यह सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह दिखाता है कि हार मान लेना ही असफलता है।

धैर्य, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे से प्रयास करने पर असफलताओं के बाद भी सफलता मिल सकती है।

सार्वजनिक प्रशंसा और चर्चा

पूर्व आर्मी अफसर और वर्तमान राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) अध्यक्ष आलोक राज ने संदीप की मेहनत की सराहना की। उन्होंने X पर लिखा:

“संदीप जी, आपने अब तक 48 परीक्षाएं दीं, मगर हार नहीं मानी। जेल प्रहरी परीक्षा में फिजिकल टेस्ट पास कर मेरिट में अच्छी पोजीशन हासिल की। आपकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो हार मान देते हैं।”

इस पोस्ट के बाद संदीप का नाम चर्चा में आ गया और उनकी कहानी युवाओं के लिए मिसाल बन गई।

💡 निष्कर्ष:
संदीप की कहानी यह साबित करती है कि बार-बार असफल होना अंत नहीं है, बल्कि धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।

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