
नई दिल्ली: बजट 2026 पेश होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को निराशा हाथ लगी है। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार 8वें वेतन आयोग (8th CPC) से जुड़ी घोषणाएं करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर गंभीर चर्चा नहीं हुई, तो 12 फरवरी 2026 को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी।
केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और श्रमिक महासंघ (CCGEW) ने पहले ही कैबिनेट सचिव को नोटिस भेजा था। इसमें कहा गया कि 8वें वेतन आयोग और अन्य मुद्दों से जुड़ी मांगें अनदेखी होने पर हड़ताल की जाएगी। बजट 2026 में वेतन या पेंशन में कोई तत्काल संशोधन का जिक्र नहीं किया गया, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इंतजार करना पड़ रहा है।
बजट में क्या था?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे और सुधारों पर जोर दिया, लेकिन 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन या पेंशन में किसी प्रकार के संशोधन या आवंटन का उल्लेख नहीं किया। अधिकारियों का कहना है कि आयोग अभी अपने शुरुआती चरण में है और इसकी सिफारिशें वित्तीय वर्ष 2027 तक तैयार होने की संभावना है।
CCGEW की प्रमुख मांगें:
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8वें वेतन आयोग के Terms of Reference (ToR) में बदलाव कर वेतन और पेंशन वृद्धि के सुझाव शामिल किए जाएं।
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महंगाई भत्ता (DA/DR) का 50% मूल वेतन/पेंशन में समायोजित किया जाए।
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1 जनवरी 2026 से वेतन/पेंशन में 20% अंतरिम राहत दी जाए।
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नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को बंद कर, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पुनः लागू किया जाए।
वेतन वृद्धि क्यों नहीं हुई?
8वें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप से प्रस्तुत नहीं की है। इसलिए सरकार ने बजट में वेतन या पेंशन बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं किया। वित्तीय प्रभाव को देखते हुए इस वित्तीय वर्ष में किसी भी तत्काल वृद्धि की संभावना कम मानी जा रही है।
निष्कर्ष:
केंद्र सरकार की अनदेखी के चलते केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। 12 फरवरी की हड़ताल की चेतावनी इसके संकेत हैं कि कर्मचारी संगठन अपनी मांगों के लिए सख्त कदम उठा सकते हैं।