Thursday, January 15

USS अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर: अमेरिका का परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर कितना शक्तिशाली, INS विक्रांत से कैसे तुलना करता है?

 

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तेल अवीव/वॉशिंगटन: अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य क्षेत्र में तैनाती और संभावित तनाव प्रबंधन है, हालांकि किसी सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर हाल ही में दक्षिण चीन सागर में फायर ड्रिल के दौरान देखा गया था और अब इसे ईरान और आसपास के पानी में पहुँचने में कम से कम एक हफ्ता लगेगा।

 

दुनिया का चलता-फिरता किला:

USS अब्राहम लिंकन, निमित्ज क्लास का हिस्सा, अमेरिका के सबसे ताकतवर और विनाशक एयरक्राफ्ट कैरियर्स में से एक है। इसका एयर विंग F/A-18 सुपर हॉर्नेट, F-35 स्टील्थ फाइटर, EA-18G ग्राउलर, E-2D हॉकआई और MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टर से लैस है। यह जहाज जमीन, समुद्र और आकाश में हर तरह की युद्ध क्षमता रखता है। इसका विस्थापन 1 लाख टन से अधिक है, लंबाई 333 मीटर है और इसमें दो परमाणु रिएक्टर लगे हैं, जो इसे 20–25 साल तक ईंधन के बिना समुद्र में चलने में सक्षम बनाते हैं।

 

साथ ही, इस एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में गाइडेड मिसाइल क्रूजर, विध्वंसक जहाज, पनडुब्बियां और सप्लाई जहाज शामिल हैं, जो मिलकर एक विशालकाय समुद्री शक्ति का निर्माण करते हैं। USS अब्राहम लिंकन की अनुमानित कीमत 4.5–5 अरब डॉलर है और इसके ऑपरेशन में हजारों क्रू मेंबर्स, अत्याधुनिक रडार, मिसाइल और कमांड सिस्टम तैनात रहते हैं।

 

INS विक्रांत और तुलना:

भारत का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत, जिसकी लागत लगभग 3 अरब डॉलर है, 45,000 टन विस्थापन क्षमता वाला है और इसमें 30–35 फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। जबकि USS अब्राहम लिंकन लगभग 90 एयरक्राफ्ट के साथ ऑपरेट होता है और परमाणु ऊर्जा से चलता है, INS विक्रांत पारंपरिक ईंधन पर निर्भर है। हालांकि क्षमता में अंतर है, लेकिन INS विक्रांत हिंद महासागर में भारत की समुद्री रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभाता है।

 

ऐतिहासिक भूमिका:

USS अब्राहम लिंकन ने अपने जीवनकाल में इराक और अफगानिस्तान युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई है। 2011 में ओसामा बिन लादेन ऑपरेशन के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसी कैरियर पर सैनिकों को संबोधित किया था। 2019 में इसे ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच भी मिडिल ईस्ट की ओर तैनात किया गया था।

 

अमेरिका के पास कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जो इसे वैश्विक नौसैनिक ताकत में शीर्ष पर बनाए रखते हैं। अब देखना यह है कि USS अब्राहम लिंकन की तैनाती मिडिल ईस्ट में कैसे तनाव और रणनीति को प्रभावित करती है।

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