Tuesday, January 13

तेजस्वी की चुप्पी या बड़े तूफान की आहट? राजद के ‘मंथन काल’ के पीछे रणनीति तैयार

 

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पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव बेहद कम बोल रहे हैं। मीडिया के सामने भी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं और काफी समय तक विदेश दौरे पर रहे। उनके इस मौन के पीछे कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजद सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर नई रणनीति तैयार कर ली है।

 

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, तेजस्वी यादव का यह मौन ‘मंथन काल’ है। चुनावी हार के बाद पार्टी और संगठन के कई मुद्दों पर चिंतन करना आवश्यक होता है। तेजस्वी यादव इस समय सामाजिक समीकरण, संगठनिक मजबूती और आगामी चुनाव की रणनीति पर गहन मंथन कर रहे हैं।

 

 

गठबंधन और साथी दलों का मूल्यांकन

 

तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के साथी दलों की ताकत और कमजोरियों का मूल्यांकन किया है। पिछले चुनाव में बूथ स्तर पर गठबंधन की एकजुटता नहीं दिखी थी, जिससे आधार वोटों में बिखराव हुआ। आगामी चुनाव से पहले तेजस्वी यादव ने साथी दलों के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, योजनाओं की जमीनी हकीकत का मूल्यांकन करने और जनता के बीच सामूहिक विरोध अभियान चलाने की रणनीति तैयार की है।

 

राजद की निगाहें विशेषकर महिला योजनाओं और रोजगार पर हैं। आधी आबादी को मिले 10 हजार रुपये और दो लाख रुपए व्यवसाय योजना की असफलताओं को पार्टी आगामी चुनाव में सत्ता के खिलाफ अभियान का मजबूत आधार बनाएगी।

 

 

पारिवारिक एकता और संगठन में बदलाव

 

तेजस्वी यादव ने इस समय का उपयोग पारिवारिक एकता को लेकर भी किया है। उन्होंने परिवार के बीच आई दूरियों का विश्लेषण किया और संदेश दिया कि जो परिवार नहीं चला सकता, वह राज्य नहीं चला सकता।

 

साथ ही, राजद संगठन में बड़े फेरबदल के संकेत भी मिल रहे हैं। 14 फरवरी के बाद होने वाली बैठक में पार्टी के सभी पदाधिकारियों की राय लेकर संगठन में बदलाव और सुधार किए जाएंगे। विशेषकर उन जिलों में जहां पार्टी का गढ़ कमजोर हुआ, वहां सांगठनिक सुधार पर जोर दिया जाएगा।

 

 

विदेश दौरे से मिला मंथन का समय

 

यूरोप दौरा तेजस्वी यादव के लिए मंथन और चिंतन का अवसर रहा। इस दौरान उन्होंने हार के कारणों, संगठन, दोस्त-दुश्मन और भीतरघात जैसे सभी पहलुओं पर विचार किया। उनका यह बैकअप काल राजनीति में नई रणनीति तैयार करने और नीतीश कुमार की मजबूत स्थिति के सामने संकट खड़ा करने की तैयारी का हिस्सा है।

 

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजस्वी यादव का यह मौन केवल सन्नाटा नहीं, बल्कि आगामी चुनाव और राजद संगठन की नई सूरत तैयार करने की रणनीति है।

 

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