Tuesday, January 13

शक्सगाम वैली: चीन सियाचिन के लिए बढ़ा रहा खतरा

 

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शक्सगाम वैली, जो जम्मू-कश्मीर के उत्तर में स्थित है, सियाचिन ग्लेशियर और साल्टोरो रिज के ठीक उत्तर में है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहाँ चीन की मौजूदगी सीधे सियाचिन के भारतीय ठिकानों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

 

चीन ने शक्सगाम वैली में करीब 16,000 फीट ऊँचाई पर सड़क निर्माण शुरू कर दिया है। यह सड़क कराकोरम हाईवे को ऊपरी शक्सगाम इलाके से जोड़ने की दिशा में बनाई जा रही है। यदि यह सड़क आगे बढ़ती है, तो चीन सियाचिन पर उत्तर दिशा से दबाव डालने में सक्षम हो सकता है, जबकि पाकिस्तान पहले से दक्षिण और पश्चिम की ओर मौजूद है।

 

भारत ने 9 जनवरी को कहा था कि CPEC के जरिए चीन का इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण अवैध और अमान्य है। भारत का साफ़ कहना है कि शक्सगाम वैली का यह हिस्सा उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।

 

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि 1963 में पाकिस्तान ने चीन को शक्सगाम वैली का कोई अधिकार नहीं दिया था, और चीन ने 1962 की जंग के बाद इस इलाके पर कब्जा करने का मौका देखा।

 

हालांकि, शक्सगाम वैली और सियाचिन के बीच कराकोरम रेंज की ऊँची बर्फीली चोटियां मौजूद हैं, इसलिए किसी भी बड़े सैन्य अभियान के लिए यह क्षेत्र बेहद दुर्गम है। बावजूद इसके, चीन मल्टी-रॉकेट और आर्टिलरी सिस्टम के जरिए सियाचिन के उत्तरी हिस्सों को निशाना बना सकता है, यदि वह पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर ले।

 

कुल मिलाकर, शक्सगाम वैली का चीन द्वारा सैन्य और लॉजिस्टिक उपयोग, भारत के लिए डबल फ्रंट खतरे का संकेत देता है। भारत ने पिछले वर्षों में कई बार औपचारिक विरोध जताया है, लेकिन सीमा वार्ता 2020 के बाद लंबित है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

 

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