
नई दिल्ली: बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने वाली फिल्म ‘धुरंधर’ ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली है। फिल्म की चर्चा में सबसे ज्यादा सुर्खियां अक्षय खन्ना के रोल ने बटोरीं। कई फैंस का कहना है कि अक्षय ने अपने साइड रोल में इतना दमदार प्रदर्शन किया कि वे मेन हीरो रणवीर सिंह से भी ज्यादा प्रभावशाली नजर आए।
हालांकि, यही फिल्म पेरेंटिंग के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण सबक देती है। पेरेंटिंग कोच परीक्षित जोबनपुत्रा का कहना है कि माता-पिता को अपने बच्चों के प्रयास और मेहनत पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिर्फ रोल या नतीजे पर।
अक्षय खन्ना का किरदार प्रेरणादायक:
परीक्षित जोबनपुत्रा के अनुसार, अक्षय खन्ना ने फिल्म में भले ही साइड रोल निभाया, लेकिन उन्होंने उसे इतनी बखूबी निभाया कि उनका डांस स्टेप और गाना वायरल हो गया। इस बात से माता-पिता को सीख मिलती है कि किसी भी रोल का महत्व कम नहीं होता, अगर उसमें पूरी मेहनत और समर्पण दिया गया हो।
फोकस मेहनत पर, न कि आउटपुट पर:
एक्सपर्ट का कहना है कि अक्सर माता-पिता अपने बच्चों के लिए “सबसे बड़ा रोल” या “सर्वश्रेष्ठ अवसर” पाने पर जोर देते हैं। लेकिन सही दिशा यह है कि बच्चे जिस भी भूमिका या स्टेज पर हों, उसमें वे अपना 100% प्रयास दें। यही दृष्टिकोण बच्चों की सफलता और आत्मविश्वास को मजबूत करता है।
पेरेंटिंग में बदलाव जरूरी:
परीक्षित जोबनपुत्रा बताते हैं कि अगर हम बच्चों को सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें हमेशा प्रक्रिया (प्रोसेस) पर फोकस करना सिखाएं, न कि सिर्फ नतीजे पर। उदाहरण के तौर पर, यह देखने की बजाय कि बच्चा नंबर वन आया या नहीं, यह देखना चाहिए कि उसने अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन किया या नहीं।
इस तरह, ‘धुरंधर’ सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि पेरेंटिंग और बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन देने का भी एक अहम सबक बनकर सामने आई है।