
भोपाल: राजधानी के आधुनिक सरकारी स्लॉटर हाउस से मुंबई भेजे जा रहे मांस में गोमांस मिलने की खबर ने सियासत में भूचाल ला दिया है। 17 दिसंबर को पकड़े गए 26 टन मांस के कंटेनर की रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है।
नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने दोषियों को चेतावनी देते हुए कहा, “रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। असलम चमड़ा हो या कहीं का चमड़ा, उसकी चमड़ी उतार दी जाएगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्लॉटर हाउस का कोई भी प्रस्ताव परिषद में नहीं आया और इसे संरक्षण देने वाले किसी भी शख्स को छोड़ा नहीं जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष का आरोप
नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने महापौर परिषद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जनहित से जुड़े इतने संवेदनशील विषय को परिषद की बैठक में लाने के बजाय एमआईसी के भीतर ही गोपनीय तरीके से पारित कर दिया गया। जकी ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया और महापौर तथा पूरी परिषद से तत्काल इस्तीफे की मांग की।
पशु चिकित्सा अधिकारी भी कटघरे में
नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बेनीप्रसाद गौर की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। दस्तावेजों के अनुसार, डॉक्टर ने प्रमाणित किया था कि स्लॉटर हाउस में 15 साल से अधिक उम्र की 85 भैंसों का वध किया गया। लेकिन पुलिस सैंपल में गोमांस की पुष्टि हुई, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी संरक्षण में भैंस के नाम पर गायों का वध किया गया।
कैसे खुला राज
17 दिसंबर की रात हिंदू संगठनों ने पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक कंटेनर को रोका। जांच में पता चला कि 15 और 16 दिसंबर की रात बैतूल से 160 बछड़े भोपाल लाए गए थे, जिनका करीब 26 टन मांस मुंबई भेजा जा रहा था। इस खुलासे के बाद भोपाल का जिंसी स्लॉटर हाउस सील कर दिया गया।
इस कांड के बाद शहर में हिंदूवादी संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन जारी है। आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो रही है।